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सकारात्मक सोच बनी दवा : जुदा शहर-जुदा लोग बने उम्मीद और सेवा के संकल्प का साझा चेहरा

Tue, 27 Apr 2021 06:50 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल को दहलाने और आंखें भिगा देने वाले दारुण दृश्यों के बीच कहानियां उम्मीद... संबल और सेवा के संकल्प की अनूठी प्रेरणाएं हैं। 96 वर्ष की उम्र में बाईपास सर्जरी के बावजूद संक्रमण को अपनी जिजिविषा के बूते मात देने वाले इंदौर निवासी माणकचंद हौसला देते हैं तो टोंक के खंडेलवाल परिवार ने दिखाया कि बिना घबराए घर पर ही इलाज संभव है। ये ही नहीं दुआओं को दवा बना देने वाले जयपुर के डॉक्टर, गर्भवती होने और रोजे रखते हुए भी कोरोना के मरीजों की देखभाल में जुटी हैं, हम इन योद्धाओं के बूते फतेह जरूर पा लेंगे।
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कोरोना वायरस(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : pixabay
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विस्तार
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दिमाग पर हावी न होने दें बीमारी ( इंदौर )

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कोरोना का नाम सुनते ही अक्सर लोगों को घबराहट होने लगती है। लेकिन इंदौर निवासी 96 वर्षीय माणकचंद मारू की कहानी ठीक इसके उलट है। उनहोंने मजबूत मानसिकता और जीने की इच्छाशक्ति के बूते उम्र के इस पड़ाव पर महामारी को मात दी है। बाइपास सर्जरी करा चुके मारू बताते हैं, बीमारी का पता लगते ही सकारात्मक रहकर इसे हराने का संकल्प लिया।

 मारू कहते हैं कि इस उम्र में भी संक्रमण के बावजूद चल पा रहा था और छोटे-छोटे काम भी निपटा रहा था। सही दिनचर्या व संतुलित खान-पान से महामारी को कुछ ही दिन में हरा दिया। संक्रमितों से कहना चाहता हूं कि जिजीविषा बनाए रखें।
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...दुआ भी कर रहे डॉक्टर (जयपुर)
कहते है, जब दवा असर न करे तो दुआ भी काम आती है। अस्पताल में मरीजों के सैलाब के बीच जयपुरस में एक दिल छूने वाली दास्तां देखने को मिल रही है। रूंगटा अस्पताल में कोविड मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर दवाओं के साथ उनके लिए दुआ भी कर रहे हैं। एक मरीज राजकुमार के बेटे रामकुमार ने बताया कि पिताजी हार मान चुके थे लेकिन तभी इलाज कर रहे डॉक्टरों ने दुआ को दवा बनाया और वार्ड में ही पाठ करवाने लगे। रामकुमार बताते हैं तीन दिन में ही पिताजी की सेहत पर वाकई असर दिखने लगा। दवा और दुआ के माहौल में नए मरीजों का भी मनोबल बढ़ता है।

नर्स ने कर्म और धर्म निभाया (सूरत)
कोरोना के कहर में जब सभी को अपनी जान की फ्रिक हो तो वहीं सूरत में एक गर्भवती नर्स ने नजीर पेश की है। शहर के कोविड केयर सेंटर में चार माह की गर्भवती नैंसी आयशा मिस्त्री कई दिनों से संक्रमितों की देखभाल कर रही हैं। आयशा कहती हैं सेवा ही सबसे बड़ी इबादत है।
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घर पर ही ठीक हुआ परिवार (टोंक)
अक्सर कोरोना मरीज घबराहट में अस्पताल का रुख करन लगते हैं लेकिन संयम और सकारात्मक से घर पर ही कोरोना को मात देने वाले भी कम नहीं है।राजस्थान के टोंक जिले में एक परिवार ने घर पर रहकर दवाएं लीं और दिशा-निर्देशों का पालन किया।

 

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