लोकसभा चुनाव 2019 पहला ऐसा चुनाव होगा, जिसमें सोशल मीडिया, अप्रवासी भारतीय और थर्ड जेंडर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। देश के करीब 56 करोड़ सोशल मीडिया वारियर सीधे चुनाव को प्रभावित करेंगे। इनमें 18 से 19 साल के 1.5 करोड़ मतदाता सबसे अहम हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय यह मतदाताओं का ऐसा समूह है जो एक दूसरे को अपने विचारों से प्रभावित करेगा।
सोशल मीडिया के ज्यादा उपयोग के चलते चुनाव आयोग को आदर्श आचार संहिता में नए नियमों को शामिल करना पड़ा। चुनाव में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए बाकायदा इंटरनेट कंपनियों के साथ चर्चा करनी पड़ी। सियासी दल बड़े पैमाने पर सोशल साइट्स की मदद से प्रचार-प्रसार करते हैं। ट्विटर हैंडल पर हैशटैग ‘मैं भी चौकीदार’ इसका ताजा उदाहरण है।
पुलवामा हमले के बाद राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप वाले वीडियो पर तो आयोग को दिशा-निर्देश जारी करना पड़ा था। युवा वर्ग के मतदाताओं की बड़ी तादाद को देखते हुए इस बार सभी दल इन्हें ध्यान में रख कर प्रचार की रणनीति बना रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी युवाओं को रिझाने के लिए रोजगार, तकनीक और उनके उत्थान की नीतियों को बढ़-चढ़कर पेश कर रहे हैं।
देश में 30 करोड़ फेसबुक यूजर
देश में 2018 दिसंबर तक 30 करोड़ लोग फेसबुक का इस्तेमाल कर रहे थे। 20 करोड़ लोग व्हाट्सएप से जुड़े हैं। इसी तरह ट्विटर को भी करीब 31 करोड़ लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। देश ही सभी अहम सूचना और नेताओं के एक दूसरे से सवाल जवाब इसी माध्यम से आ रहे हैं। इनमें लगभग 60 फीसदी से ज्यादा एक से ज्यादा सोशल नेटवर्किंग साइट से जुड़े हैं, इसलिए इस बार के चुनाव को कई मायनों में अलग करके देखा जा रहा है।
अप्रवासी भी खेल बनाने-बिगाड़ने का काम करेंगे
अप्रवासी भारतीय वोटों के लिहाज से भले ही बड़े पैमाने पर हारजीत को प्रभावित करने की स्थिति में न हों, लेकिन इनकी मौजूदगी दल विशेष के लिए राजनीतिक समीकरण बनाने-बिगाड़ने का काम करेगी। इसकी बानगी 2014 के चुनाव में भाजपा और आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रचार में देखने के मिली थी।
आयोग के आंकड़ों के मुताबिक कुल 71735 अप्रवासी मतदाता हैं। अप्रवासी वोटरों में 66866 पुरुष, 4849 महिला और 20 किन्नर शामिल हैं। इनमें केरल के एनआरआई मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा 66584 है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश 2511 और तेलंगाना में इन वोटरों का आंकड़ा 1127 है। पूरे देश में 39683 थर्ड जेंडर के मतदाता हैं। इनमें सर्वाधिक 8374 यूपी से, 5472 तमिलनाडु और 3761 आंध्र प्रदेश से हैं।
महत्वपूर्ण आंकड़े
कुल मतदाता 89.87 करोड़
2014 के मुकाबले 8.4 करोड़ मतदाता बढ़े
46,47,20,635 पुरुष मतदाता
43,13,16,589 महिला मतदाता
39,683 थर्ड जेंडर वोटर हैं
16.5 लाख सर्विस वोटर भी हैं
लैंगिक अनुपात में दिल्ली फिसड्डी
मतदाता लैंगिक अनुपात के मामले में राजधानी दिल्ली सबसे फिसड्डी है। दिल्ली में प्रति एक हजार पुरुषों के मुकाबले 812 महिला मतदाता हैं। वहीं यूपी, बिहार, पंजाब और हरियाणा सहित सात राज्यों में मतदाताओं का लैंगिक अनुपात प्रति एक हजार पुरुष पर 800 से 900 के बीच महिला वोटर हैं।