केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी का डिग्री विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी दी है। न्यायमूर्ति एसपी गर्ग ने अहमर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें निचली अदालत के फैसले की प्रति पेश करने का निर्देश दिया। इस मामले में अगली सुनवाई 13 सितंबर को होगी।
याची ने आरोप लगाया कि चुनाव से पूर्व चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में स्मृति ईरानी ने अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में अलग-अलग जानकारी दी। याची ने पहले निचली अदालत में याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया।
याची ने इस फैसले को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता अनूप चौधरी ने कहा कि इस मुद्दे पर निचली अदालत ने शिकायतकर्ता के साक्ष्यों व गवाहों पर गौर नहीं किया और गलत तरीके से फैसला सुना दिया।
18 अक्तूबर 2016 को निचली अदालत ने कहा था कि याचिका लगाने में 11 वर्ष की देरी की गई है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि जानबूझ कर केंद्रीय मंत्री को प्रताड़ित करने के इरादे से ऐसा किया गया है। याची के अनुसार स्मृति ने अप्रैल 2004 के चुनावी हलफनामे में कहा था कि उन्होंने 1996 में दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्राचार के जरिये बीए किया था।
इसके बाद जुलाई 2011 में गुजरात से राज्यसभा सदस्य के चुनाव के दौरान स्मृति ने कहा कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम प्रथम वर्ष पास हैं। वर्ष 2014 के हलफनामे में भी कहा कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से बी.कॉम प्रथम वर्ष पास हैं।