अरुणाचल प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री कामेंग डोलो अपनी चुनावी जीत की सुप्रीम कोर्ट में भी कानूनी लड़ाई हार गए। उनकी गुवाहाटी हाईकोर्ट के खिलाफ दायर याचिका को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 2014 में पक्के केसांग के विधानसभा चुनाव को शून्य घोषित कर दिया था।
8 फरवरी को आए इस फैसले के खिलाफ निर्विरोध चुने गए कांग्रेस उम्मीदवार डोलो ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। भाजपा प्रत्याशी अतुम वेली ने डोलो के निर्विरोध चुने जाने को चुनौती दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनका नामांकन कथित रूप से वापस करा दिया था।
शीर्ष अदालत की पीठ ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि प्रत्याशी के नामांकन वापसी को ‘अवैध स्वीकृति’ लोकतंत्र के लिए घातक है। इसके अलावा अगर वैधानिक प्रावधान के उल्लंघन में ऐसा किया गया तो यह लोकतंत्र के लिए अपवित्र है।
डोलो 2016 में राज्य में कलिखो पुल की सरकार में उपमुख्यमंत्री थे। तत्कालीन चुनाव में मात्र दो ही प्रत्याशी मैदान में थे। वेली के कथित नामांकन वापसी के बाद डोलो विधानसभा से निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए थे। इसके बाद वेली हाईकोर्ट पहुंचे और अदालत ने कहा 15 मार्च 2014 के चुनाव में गड़बड़ी की गई और इस चुनाव को शून्य घोषित कर दिया था।