आंध्र प्रदेश में बाढ़ के कहर से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है। हाल ये है कि लगातार बारिश के बाद लोगों के घर जलमग्न हो गए हैं। वहीं बाढ़ जैसी स्थिति को देखते हुए राज्य में मानवीय सहायता और आपदा राहत प्रयासों को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। बुधवार को मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने बारिश और बाढ़ के चलते जान गंवाने वाले 20 लोगों के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया। वहीं राज्य में बचाव और राहत अभियान जारी है।
आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के कई हिस्सों में हुई बारिश और बाढ़ से अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ और बारिश के चलते राज्य में 3312 किमी सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं। जबकि 1.69 लाख हेक्टेयर में कृषि फसलें क्षतिग्रस्त हो गईं और 18,424 हेक्टेयर में बागवानी फसलें क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 6.44 लाख हो गई और 42,707 लोगों को 193 राहत शिविरों में रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मृत व्यक्तियों के परिवारों की पहचान करने या उनके शव सौंपने या सरकार की ओर से अंतिम संस्कार करने का निर्देश दिया। उन्होंने सरकार की ओर से मृत व्यक्तियों के परिवारों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया। साथ ही अधिकारियों को पानी, बिस्कुट, फल और दूध जैसी आवश्यक वस्तुएं वितरित करने के निर्देश दिए। नायडू ने स्वच्छता कार्य शुरू करने और अधिकारियों से तेजी से बिजली बहाल करने के लिए कहा।
वहीं बुधवार सुबह राहत शिविरों में 2.3 लाख नाश्ते के पैकेटे वितरित किए गए। अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो दिनों से हेलीकॉप्टरों ने आवासीय क्षेत्र में भोजन के पैकेट गिराए हैं। राज्य सरकार खाने के पैकेट गिराने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल कर रही है। एक निजी ड्रोन कंपनी भी आवश्यक चीजें उपलब्ध कराने के लिए तैनात की गई है।
इसके अलावा एनटीआर, गुंटूर, बापटला, पलनाडु, कृष्णा, एलुरु और पश्चिम गोदावरी के सात जिलों में अधिकारियों ने आवश्यक वस्तुओं के वितरण के लिए 63,894 परिवारों की पहचान की है। इनको 25 किलो चावल, एक किलो लाल चने की दाल, एक लीटर खाना पकाने का तेल, एक किलो चीनी, एक किलो प्याज और एक किलो आलू जैसी आवश्यक वस्तुएं दी जाएंगीं।
पश्चिम गोदावरी जिला मुख्यालय भीमावरम और आसपास के स्थानों पर मंगलवार रात से बुधवार दोपहर तक बारिश हुई। इस दौरान भीमावरम से गुडीवाड़ा तक हजारों एकड़ धान के खेत जलमग्न हो गए। इसे पहले विजयवाड़ा में प्रकाशम बैराज ने पांच लाख क्यूसेक से अधिक बाढ़ का पानी छोड़ा गया। जबकि पुलिचिंतला परियोजना, एक प्रमुख सिंचाई परियोजना से 1.82 लाख क्यूसेक से अधिक बाढ़ का पानी छोड़ा गया।