सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि सिल्वरलाइन सेमी-हाईस्पीड-रेल प्रोजेक्ट केरल राज्य सरकार और केंद्र सरकार की संयुक्त उद्यम परियोजना है। इस परियोजना में केंद्र सरकार भी बराबर की हिस्सेदार है। इसलिए सभी सवालों की जवाबदेही के लिए आप भी उतने ही जिम्मेदार हैं।
केरल सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट 'सिल्वरलाइन सेमी-हाईस्पीड-रेल प्रोजेक्ट में चल रहे विवाद को लेकर केंद्र सरकार ने केरल हाई कोर्ट में शनिवार को हलफनामा दाखिल किया। केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में बताया है कि उसने केरल सरकार को 'सिल्वरलाइन सेमी-हाईस्पीड-रेल प्रोजेक्ट' को लेकर एसआईए या निजी भूमि में पत्थर बिछाने के लिए कोई अनुमति नहीं दी है। इस मामले में केरल हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है।
विज्ञापन
साथ ही केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि केरल सरकार ने इसकी अनुमति के लिए न तो रेलवे से संपर्क किया और ना ही एसआईए या पत्थर बिछाने की अनुमति के लिए कोई नोटिस दी।
इससे पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि सिल्वरलाइन सेमी-हाईस्पीड-रेल प्रोजेक्ट केरल राज्य सरकार और केंद्र सरकार की संयुक्त उद्यम परियोजना है। इस परियोजना में केंद्र सरकार भी बराबर की हिस्सेदार है। इसलिए सभी सवालों की जवाबदेही के लिए आप भी उतने ही जिम्मेदार हैं।
विज्ञापन
इस मामले में सभी दलीलें सुनने के बाद केरल हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायधीश देवान रामचंदन ने इस प्रोजेक्ट के लिए पत्थर बिछाने के खिलाफ दाखिल सभी याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
क्या है सिल्वरलाइन सेमी-हाईस्पीड-रेल प्रोजेक्ट
सिल्वरलाइन सेमी-हाईस्पीड-रेल प्रोजेक्ट के तहत 529.45 किलोमीटर लंबी लाइन के निर्माण का प्रस्ताव है। इसमें केरल के 11 जिले शामिल होंगे। प्रोजेक्ट पूरा होने पर कासरगोद से तिरुवनंतपुरम तक 200 किमी/ घंटा की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों में चार घंटे से भी कम समय में यात्रा की जा सकती है। अभी ट्रेनों से यह दूरी तय करने में करीब 12 घंटे लगते हैं। केरल रेल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (KRDCL) के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 2025 तक का समय निर्धारित किया गया है। KRDCL या K-Rail, केरल सरकार और केंद्रीय रेल मंत्रालय के बीच एक संयुक्त उद्यम है।
प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की मंजूरी दी जा चुकी है। इस परियोजना का मकसद राज्य के उत्तरी और दक्षिणी छोर के बीच यात्रा के समय को कम करना है। 63,941 करोड़ रुपये की अनुमानित परियोजना को सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार का सबसे बड़ा बुनियादी ढांचागत उपक्रम माना जा रहा है। परियोजना के कारण नौ हजार भवन गिराए जाएंगे और करीब 10 हजार परिवार विस्थापित होंगे।