एसडीएफ का दावा- अनुच्छेद 371एफ का किया गया उल्लंघन
सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के प्रमुख और तमांग के पूर्ववर्ती पवन कुमार चामलिंग ने हाल ही में दावा किया था कि पूर्वोत्तर राज्य के लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं क्योंकि अनुच्छेद 371एफ का 'उल्लंघन' किया गया है। इस अनुच्छेद के अनुसार, केवल सिक्किम के वंशज (जो 1975 में भारत के साथ विलय से पहले राज्य में रहते थे) जिनके नाम 1961 के रजिस्टर में उल्लिखित थे, सिक्किमी हैं जिनके पास जमीन का स्वामित्व और राज्य सरकार की नौकरी पाने का अधिकार है। उन्हें आयकर का भुगतान करने से भी छूट दी गई थी।
तो पूरे मंत्रिमंडल के साथ दे दूंगा इस्तीफा..
तमांग ने अंबेडकर जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा, मैं उन सभी को चुनौती देता हूं जो यह कहते हुए अफवाह फैला रहे हैं कि 371एफ खत्म हो गया है। उन्होंने कहा, 'अगर सिक्किम लोक सेवा आयोग द्वारा विज्ञापित सहायक निदेशक (आईटी) के पद के लिए पहचान प्रमाण पत्र और सिक्किम विषय प्रमाणपत्र के बिना लोग आवेदन करते हैं और यदि उन आवेदनों को स्वीकार कर लिया जाता है, तो मैं पूरे मंत्रिमंडल के साथ इस्तीफा दे दूंगा।'
2024 के विधानसभा चुनाव में बनेगा मुद्दा?
चामलिंग की एसडीएफ, महान फुटबॉलर बाईचुंग भूटिया की 'हमरो सिक्किम पार्टी' और नागरिक समाज संगठन 'ज्वाइंट एक्शन काउंसिल' सिक्किम के लोगों की परिभाषा के विस्तार का विरोध करते रहे हैं और आरोप लगाते रहे हैं कि अनुच्छेद 371एफ को हमेशा के लिए कमजोर कर दिया गया है। चामलिंग ने पहले संकेत दिया था कि 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव में यह एक मुद्दा होगा। उन्होंने कहा, 'लोग इस मुद्दे पर बहुत गुस्से में हैं।
एसडीएफ ने कहा था- यहां तीन साल के भीतर हो जाएगा कब्जा
राज्य में 25 साल तक शासन करने वाले एसडीएफ अध्यक्ष ने इस महीने की शुरुआत में एक साक्षात्कार में कहा था, हमारी आबादी केवल 6-7 लाख है और हमें डर है कि 2-3 साल के भीतर हमारे यहां पर बसने वालों का कब्जा हो जाएगा। तमांग ने इससे पहले एक फेसबुक पोस्ट में कहा था कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में एक बैठक के दौरान उन्हें आश्वासन दिया था कि संशोधन केवल आयकर छूट से संबंधित है और 'सिक्किमी' की मूल परिभाषा का हमेशा सम्मान किया जाएगा।
सिक्किम विधानसभा ने 10 अप्रैल को एक प्रस्ताव पारित कर हाल ही में पारित वित्त अधिनियम, 2023 में सिक्किमी की परिभाषा के विस्तार पर केंद्र से स्पष्टीकरण मांगा। विश्लेषकों का मानना है कि सिक्किम के राजनेताओं की मुख्य चिंता यह है कि भूमि अधिकार जो अब केवल उन सिक्किमियों को प्राप्त हैं, जिनके माता-पिता पूर्ववर्ती चोग्याल साम्राज्य के अधीन थे, हिमालयी राज्य में रहने वाले किसी भी भारतीय को दिए जाएंगे।
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