सांसद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि अधिकारी ने 26 जुलाई को यहां भाजपा कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में उनके खिलाफ कुछ अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। उन्होंने मानहानि मुकदमा दायर किया था। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी अब तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बयान नहीं दे पाएंगे। कोलकाता की अलीपुर अदालत ने मानहानि मामले में शुभेंदु अधिकारी को अपमानजनक बयान देने से रोका है।
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तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर दीवानी मानहानि मुकदमे में आदेश पारित करते हुए अलीपुर अदालत के 8वें न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई 19 अगस्त को फिर से की जाएगी। सिविल जज ने आदेश में कहा कि प्रतिवादी को आज से 19 अगस्त तक कोई भी मानहानिकारक बयान देने, प्रकाशित करने, प्रकाशित करवाने, मुद्रित करवाने और मौखिक या लिखित रूप से वादी के लिए कोई भी मानहानिकारक शब्द कहने से रोका जाता है।
इससे पहले अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि अधिकारी ने 26 जुलाई को यहां भाजपा कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में उनके खिलाफ कुछ अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। टीएमसी सांसद ने भाजपा नेता को उनके खिलाफ कोई भी अपमानजनक बयान देने से रोकने के लिए अंतरिम निषेधाज्ञा का आदेश देने का अनुरोध किया था।
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव बनर्जी का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि अदालत का मानना है कि प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि टीएमसी सांसद और भाजपा नेता दोनों सार्वजनिक हस्तियां हैं और समाज में उनकी प्रतिष्ठा है, लेकिन यह भी एक तथ्य है कि उनके बीच एक-दूसरे के साथ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी है।
शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमला
इससे पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर कूचबिहार जिले में हमला हुआ। एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शुभेंदु के काफिले पर हमला किया। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने आरोपों को सुनियोजित नाटक करार दिया। कूचबिहार पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर भाजपा के प्रदर्शन का नेतृत्व करने उत्तर बंगाल जिले गए अधिकारी को नारेबाजी का सामना करना पड़ा। उन्हें खगराबाड़ी इलाके के पास काले झंडे दिखाए गए।