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Axiom 4 Mission: पीएम मोदी ISS पर गए शुभांशु से बोले- आपकी यात्रा नए युग का शुभ आरंभ, देश की भावनाएं आपके साथ

Sat, 28 Jun 2025 06:08 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 14 दिनों के मिशन पर गए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से बात की। शुभांशु एक्सिओम-4 मिशन पर तीन अन्य देशों के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ गए हैं। पीएम मोदी ने शुभांशु से लगभग 18 मिनट तक अंतरिक्ष, भारत से सपने और उनके अनुभवों से मिलने वाले लाभ जैसे पहलुओं पर विस्तार से बात की। जानिए शुभांशु और पीएम के बीच क्या बातें हुईं
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पीएम नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन गए भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से बात की - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से बात की, जो इन दिनों अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी- नासा के एक्सिओम 4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (आईएसएस) की यात्रा पर हैं। शुभांशु बुधवार को ऐतिहासिक यात्रा पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए रवाना हुए थे। 41 साल के लंबे अंतराल के बाद पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री के रूप में अंतरिक्ष गए शुभांशु से पीएम मोदी ने अंतरिक्ष की जीरो ग्रेविटी, उनकी इस यात्रा से बच्चों और युवाओं को मिलने वाली प्रेरणा पर बात की।

शुभांशु और पीएम मोदी के बीच 18 मिनट की बाचतीत, किन विषयों पर चर्चा हुई?

इसके अलावा उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की भावी परियोजना- गगनयान पर भी बात की। बता दें कि यह भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है। दोनों के बीच साइंस और स्पिरिचुअलिटी की ताकत, एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरिक्ष में होने वाले प्रयोगों से खेती-किसानी और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलने वाले लाभ जैसे विषयों पर भी विस्तार से बातें की। पीएम मोदी ने शुभांशु को इस अंतरिक्ष मिशन में सफलता हासिल करने के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
140 करोड़ भारतवासियों की भावनाएं...
प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु से कहा, आप आज मातृभूमि से, भारत भूमि से सबसे दूर हैं, लेकिन भारतवासियों के दिलों के सबसे करीब हैं। आपके नाम में भी शुभ है और आपकी यात्रा नए युग का शुभ आरंभ भी है। इस समय बात हम दोनों कर रहे हैं, लेकिन मेरे साथ 140 करोड़ भारतवासियों की भावनाएं भी हैं। मेरी आवाज में सभी भारतीयों का उत्साह और उमंग शामिल है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा, अंतरिक्ष में भारत का परचम लहराने के लिए मैं आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। मैं ज्यादा समय नहीं ले रहा हूं, सबसे पहले तो ये बताइए कि वहां सब कुशल मंगल है, आपकी तबीयत ठीक है?
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अंतरिक्ष पहुंचने के बाद पीएम मोदी से बात करने के दौरान शुभांशु के बयान का अंश - फोटो : अमर उजाला
अंतरिक्ष में बहुत अच्छा लग रहा है
पीएम मोदी को जवाब देते हुए ग्रुप कैप्टन शुभांशु ने कहा, 'जी प्रधानमंत्री जी, आपका और 140 करोड़ देशवासियों की शुभकामनाएं के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं यहां बिल्कुल ठीक हूं, सुरक्षित हूं, आप सबके आशीर्वाद और प्यार की वजह से। बहुत अच्छा लग रहा है। यह बहुत नया अनुभव है। कहीं न कहीं बहुत सारी चीजें ऐसी हो रही हैं, जो दर्शाती हैं कि मैं और मेरे जैसे लोग देश में इस दिशा में जा रहे हैं।'

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ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और नरेंद्र मोदी की बातचीत - फोटो : एएनआई
सपनों को भी साकार करने का मौका
उन्होंने आगे कहा, ये जो मेरी यात्रा है, ये पृथ्वी से ऑर्बिट की 400 किलोमीटर की छोटी सी यात्रा है, ये सिर्फ मेरी नहीं है, बल्कि मेरे देश की भी यात्रा है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु ने आगे कहा, मैं जब छोटा था। मैं कभी सोच नहीं पाया कि मैं अंतरिक्ष यात्री बन पाऊंगा। लेकिन मुझे लगता है कि आपके नेतृत्व में आज का भारत ये मौका देता है और उन सपनों को भी साकार करने का मौका देता है। ये मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। मैं बहुत गर्व महसूस कर रहा हूं कि मैं यहां अपने देश का प्रतिनिधित्व कर पा रहा हूं।
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पीएम मोदी ने कैप्टन शुभांशु शुक्ला से की बात - फोटो : Amar Ujala Digital
जब पीएम मोदी ने पूछा- अंतरिक्ष में साथियों को हलवा खिलाया?
इसके बाद प्रधानमंत्री ने कहा, 'शुभ, आप दूर अंतरिक्ष में हैं, जहां गुरुत्वाकर्षण बल न के बराबर है। पर हर भारतीय देख रहा है कि आप कितने डाउन टू अर्थ हैं।' पीएम मोदी ने पूछा- आप जो गाजर का हलवा ले गए, क्या उसे अपने साथियों को खिलाया?' इस पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु ने जवाब में कहा, 'जी प्रधानमंत्री जी, ये कुछ चीजें मैं अपने देश की खाने की लेकर आया था, जैसे गाजर का हलवा, मूंगदाल का हलवा और आमरस। मैं चाहता था कि ये बाकी देशों से मेरे साथी हैं, वो भी इसका स्वाद लें। वो भी भारत की समृद्ध विरासत का अनुभव करें। हम सभी ने बैठकर साथ में इसका स्वाद लिया। सबको बहुत पसंद आया।'  

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पीएम मोदी ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से की बात - फोटो : अमर उजाला
हर दिन 16 बार परिक्रमा... 28 हजार किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार
प्रधानमंत्री ने पूछा, परिक्रमा करना भारत की सदियों पुरानी परंपरा है। आपको तो धरती माता की परिक्रमा करने का सौभाग्य मिला है। अभी आप धरती के ऊपर किस भाग से गुजर रहे होंगे? ग्रुप कैप्टन शुभांशु ने जवाब में कहा, इस समय इसकी जानकारी मेरे पास उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन थोड़ी देर पहले मैं खिड़की से बाहर देख रहा था तो हम लोग हवाई के ऊपर से गुजर रहे थे और हम दिन में 16 बार परिक्रमा करते हैं। 16 सूर्योदय और 16 सूर्यास्त हम देखते हैं। यह बहुत ही अचंभित कर देने वाली प्रक्रिया है। इस समय 28 हजार किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल रहे हैं आपसे बात करते हुए। ये गति पता नहीं चलती क्योंकि हम अंदर हैं। लेकिन ये गति दिखाती है कि हमारा देश कितनी गति से आगे बढ़ रहा है।  

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शुभांशु ने अंतरिक्ष से भारत को देखने का अनुभव बताया - फोटो : अमर उजाला
भारत अंतरिक्ष से कैसा दिखता है?
पीएम मोदी ने आगे पूछा, अंतरिक्ष की विशालता देखकर आपको सबसे पहले क्या विचार आया? इस पर शुभांशु ने कहा, सच बोलूं तो जब पहली बार हम अंतरिक्ष में पहुंचे तो पहला नजारा पृथ्वी का था और पृथ्वी को देखकर पहला ख्याल जो मन में आया वो ये था कि पृथ्वी एक दिखती है, मतलब बाहर से कोई सीमा रेखा नहीं दिखाई देती। दूसरी चीज ये थी जब भारत को देखा तो मानचित्र के बारे में जो हम पढ़ते हैं, जो आकार होता है, वह सही नहीं होता है। भारत सच में बहुत भव्य दिखता है। बहुत बड़ा दिखता है। जितना हम मानचित्र पर देखते हैं, उससे काफी बड़ा।

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एक्सिओम-4 मिशन: स्पेस स्टेशन पहुंचने पर वहां पहले से मौजूद अन्य अंतरिक्ष यात्रियों ने शुभांशु और तीन अन्य साथियों का स्वागत किया - फोटो : पीटीआई
अंतरिक्ष में परिस्थितियां धरती से कितनी अलग हैं?
पीएम मोदी ने शुभांशु ये धरती और अंतरिक्ष के वातावरण में अंतर के कारण सामने आने वाली चुनौतियों पर भी बात की। प्रधानमंत्री ने कहा, 'शुभांशु, स्पेस स्टेशन पर जाने वाले आप पहले भारतीय हैं... लंबी ट्रेनिंग करके गए हैं। अब आप रियल सिचुएशन में हैं, सच में अंतरिक्ष में हैं, वहां की परिस्थितियां कितनी अलग हैं? कैसे अडॉप्ट कर रहे हैं? इस पर शुभांशु ने कहा, हमने पिछले पूरे एक साल में सारी प्रणालियों के बारे में जानकारी ली.. प्रक्रियाओं और प्रयोगों के बारे में पता था, लेकिन अंतरिक्ष स्टेशन पर आते ही सबकुछ अचानक बदल गया। 

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एक्सिओम-4 मिशन: शुभांशु ने पीएम मोदी को गुरुत्वाकर्षण के बारे में भी बताया - फोटो : पीटीआई
अंतरिक्ष में छोटी-छोटी चीजें भी बहुत मुश्किल हो जाती हैं
बकौल शुभांशु, हमारे शरीर को ग्रेविटी में रहने की इतनी आदत हो जाती है कि हर एक चीज उससे डिसाइड होती है। अंतरिक्ष में आने के बाद गुरुत्वाकर्षण और माइक्रोग्रेविटी नहीं होने के कारण छोटी-छोटी चीजें भी बहुत मुश्किल हो जाती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया, आपसे बात करते वक्त मैंने अपने पैरों को बांध रखा है, नहीं तो मैं ऊपर चला जाऊंगा... यहां पानी पीना, पैदल चलना, सोना बहुत बड़ा चैलेंज है, आप छत पर सो सकते हैं, आप दीवारों पर सो सकते हैं, आप जमीन पर सो सकते हैं।

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पीएम मोदी ने शुभांशु से अध्यात्म और विज्ञान की ताकत पर भी बातें कीं - फोटो : एएनआई
अंतरिक्ष में विज्ञान और अध्यात्म की ताकत पर भी बात
शुभांशु ने पीएम मोदी से कहा, प्रशिक्षण के कारण अंतरिक्ष के बारे में पता सब कुछ होता है प्रधानमंत्री जी, ट्रेनिंग अच्छी है, लेकिन वातावरण के अनुसार खुद को ढालने में एक-दो दिन लगते हैं। फिर सब सामान्य हो जाता है। प्रधानमंत्री ने विज्ञान और अध्यात्म की ताकत पर भी बात की। उन्होंने पूछा, क्या उस माहौल में मेडिटेशन और माइंडफुलनेस का लाभ भी मिलता है? इस पर शुभांशु ने कहा, साइंस के साथ-साथ स्पिरिचुअलिटी भारत की ताकत है, वे इस बात से पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने कहा, भारत दौड़ रहा है और यह मिशन तो केवल एक पहली सीढ़ी है। हम जरूर आगे पहुंच रहे हैं और अंतरिक्ष में हमारे खुद के स्टेशन भी होंगे। 

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माइंडफुलनेस खुद को शांत रखते हुए अच्छे फैसले लेने में मदद करता है (प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला / एएनआई
अच्छे फैसले लेने में विज्ञान के साथ-साथ अध्यात्म का संतुलन मददगार
माइंडफुलनेस यानी विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को स्वीकार करते हुए वर्तमान में रहने को लेकर शुभांशु ने कहा, इससे भी बहुत फर्क पड़ता है। नॉर्मल ट्रेनिंग या अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण के दौरान बहुत सारी सिचुएशंस ऐसी होती हैं, जब बहुत तनाव होता है। उन सिचुएशंस में माइंडफुलनेस खुद को शांत रखते हुए अच्छे फैसले लेने में मदद करता है। विज्ञान के साथ-साथ अध्यात्म के संतुलन को लेकर उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि दोनों चीजें अगर साथ में एक प्रैक्टिस की जाएं, तो अंतरिक्ष जैसे चैलेंजिंग वातावरण में यह बहुत ही लाभप्रद होंगी। इससे लोगों को परिस्थितियों के मुताबिक बहुत जल्दी ढलने में मदद मिलेगी।

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एक्सिओम-4 मिशन: शुभांशु की टीम के शोध से चिकित्सा जगत को लाभ मिलने के आसार (सांकेतिक) - फोटो : एएनआई / WAM
शुभांशु की टीम इंसान की सेहत के किस पहलू पर शोध कर रही है?
पीएम मोदी ने शुभांशु से उनके वैज्ञानिक प्रयोगों के बारे में भी सवाल किए। उन्होंने पूछा, आप अंतरिक्ष में कई एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। क्या कोई ऐसा प्रयोग है, जो आने वाले समय में खेती या स्वास्थ्य क्षेत्र को फायदा पहुंचाएगा? प्रधानमंत्री के सवाल पर शुभांशु ने कहा, 'मैं बहुत गर्व से कह सकता हूं कि पहली बार भारतीय वैज्ञानिकों ने सात यूनिक एक्सपेरिमेंट्स डिजाइन किए हैं।' उन्होंने बताया कि पहला एक्सपेरिमेंट स्टेम सेल्स से जुड़ा है। इसका मकसद अंतरिक्ष में आने से होने वाले 'मसल लॉस' का अध्ययन करना है। बकौल शुभांशु, हम जानना चाहते हैं कि क्या कोई सप्लीमेंट देकर इस मसल लॉस को रोका जा सकता है या क्या इसे कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। इसका डायरेक्ट इंप्लीकेशन धरती पर भी है। उन्होंने बताया कि धरती पर ओल्ड एज की वजह से या आयु बढ़ने के साथ-साथ मसल लॉस होता है, ऐसे में हम परीक्षण के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे कि किया उनके ऊपर भी इन सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। शुभांशु ने विश्वास जताया कि अंतरिक्ष में होने वाले एक्सपेरिमेंट और उससे मिलने वाली जानकारी का धरती पर भी इस्तेमाल हो सकता है।

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एक्सिओम-4 मिशन: सूक्ष्म शैवालों पर अंतरिक्ष में परीक्षण के बाद धरती पर भी लाभ की उम्मीद (सांकेतिक) - फोटो : एएनआई
ये प्रयोग सफल रहा तो खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बहुत मददगार होगा
अपने अन्य वैज्ञानिक परीक्षणों के बारे में बताते हुए शुभांशु ने पीएम मोदी से कहा कि दूसरा एक्सपेरिमेंट माइक्रोएल्गी यानी सूक्ष्म शैवालों (Microalgae) की विकास प्रक्रिया के अध्ययन से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि  इनमें पोषक तत्व प्रचूर मात्रा में पाए जाते हैं। बकौल शुभांशु, अगर हम अंतरिक्ष में इन शैवालों की ग्रोथ देखने और ऐसा प्रोसेस ईजाद करने में सफल रहे, जिससे इन्हें ज्यादा तादाद में उगाया जा सके तो ये खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बहुत मददगार होगा। उन्होंने कहा, धरती पर न्यूट्रिशन प्रोवाइड करने की दृष्टि से इसके नतीजे अहम साबित होंगे। कहीं ना कहीं यह फूड सिक्योरिटी के लिए भी बहुत काम आएगा। स्पेस के सबसे बड़े एडवांटेज का उल्लेख कर शुभांशु ने कहा, यहां प्रोसेस बहुत जल्दी होते हैं। हमें महीनों या कई साल तक वेट करने की जरूरत नहीं होती।

जलीय वातावरण का बहुत अहम हिस्सा हैं सूक्ष्म शैवाल
बता दें कि माइक्रोएल्गी एककोशिकीय जीव होते हैं जो पानी में पाए जाते हैं। ये इतने छोटे होते हैं, जिसे हम बिना यंत्र की मदद के नहीं देख सकते। हालांकि, ये जलीय वातावरण का बहुत अहम हिस्सा हैं। इन्हें माइक्रोफाइट्स भी कहा जाता है। आमतौर पर मीठे पानी और समुद्री वातावरण में पाए जाने वाले इन शैवालों को माइक्रोस्कोप की मदद से देखा जाता है।

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पीएम मोदी के साथ बातचीत के दौरान शुभांशु - फोटो : एएनआई
युवाओं की सफलता का मंत्र- आप कोशिश करना कभी न छोड़ें
आप भारत की युवा पीढ़ी को क्या मैसेज देंगे? प्रधानमंत्री के इस सवाल पर शुभांशु ने कहा, मैं अपनी युवा पीढ़ी को पहले यह बताऊंगा कि भारत ने बहुत बोल्ड और बहुत ऊंचे सपने देखे हैं। इन सपनों को पूरा करने के लिए, हमें आप सबकी जरूरत है। सफलता का कोई एक रास्ता नहीं होता। कोई एक रास्ता चुनता है, कोई दूसरे रास्ते पर चलकर सफल होता है, लेकिन आप कोशिश करना कभी न छोड़ें, ये चीज हर रास्ते में कॉमन होती है। बकौल शुभांशु, अगर आपने प्रयास कभी न छोड़ने (Never Stop Trying) का मूल मंत्र अपना लिया तो आप किसी भी रास्ते पर हों, हार नहीं मानेंगे। सक्सेस चाहे आज आए या कल आए, पर आएगी जरूर।

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पीएम मोदी ने शुभांशु शुक्ला से की बात - फोटो : अमर उजाला
पीएम ने शुभांशु से कहा- चंद्रमा पर भारतीय एस्ट्रोनॉट की लैंडिंग भी करानी है
देश के पहली मानव अंतरिक्ष परियोजना का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मिशन गगनयान पर भी सवाल किए। उन्होंने शुभांशु से कहा, 'हमें मिशन गगनयान को आगे बढ़ाना है, हमें अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाना है, चंद्रमा पर भारतीय एस्ट्रोनॉट की लैंडिंग भी करानी है।' उन्होंने कहा कि इन सारे मिशंस में आपके अनुभव बहुत काम आने वाले हैं। इस पर शुभांशु ने कहा,  बिल्कुल इस पूरे मिशन की ट्रेनिंग लेने के दौरान... मुझे जो अनुभव हुए और जो सीख मिली... मैं एक स्पंज की तरह सब अब्जॉर्ब कर रहा हूं... मुझे यकीन है कि यह सारी चीजें बहुमूल्य साबित होंगी। जब मैं वापस आऊंगा... हम अपने मिशंस में अनुभव का इस्तेमाल कर सकेंगे और जल्दी से जल्दी उन्हें पूरा कर सकेंगे। मेरे साथ आए साथियों ने भी मुझसे पूछा कि हम कब गगनयान पर जा सकते हैं? उनकी बातें सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने कहा, बहुत ही जल्द। मुझे लगता है कि यह सपना बहुत जल्दी पूरा होगा।

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अंतरिक्ष पहुंचने के बाद पीएम मोदी से बात करने के दौरान शुभांशु के बयान का अंश - फोटो : अमर उजाला
अब भारत सिर्फ उड़ान नहीं भरेगा, भविष्य में...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभांशु के स्पेश मिशन को संभावनाओं से भरपूर बताते हुए कहा, आपकी यह ऐतिहासिक यात्रा सिर्फ अंतरिक्ष तक सीमित नहीं है, ये हमारी विकसित भारत की यात्रा को तेज गति और नई मजबूती देगी। भारत दुनिया के लिए स्पेस की नई संभावनाओं के द्वार खोलने जा रहा है। अब भारत सिर्फ उड़ान नहीं भरेगा, भविष्य में नई उड़ानों के लिए मंच तैयार करेगा। इस पर शुभांशु ने कहा, धरती पर अंतरिक्ष में रहने के प्रशिक्षण से लेकर स्पेस स्टेशन तक आने की यात्रा में उन्होंने बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने कहा, यहां पहुंचने के बाद मुझे लगता है कि पर्सनल होने के साथ-साथ यह हमारे देश के लिए एक बहुत बड़ा कलेक्टिव अचीवमेंट है। 

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पीएम मोदी से बात करते हुए बोले शुभांशु- ISS पर भारतीय होने के नाते गर्व - फोटो : अमर उजाला
युवाओं और बच्चों से मुखातिब हुए ग्रुप कैप्टन शुभांशु
शुभांशु पीएम मोदी से करीब 18 मिनट तक चली बातचीत के अंतिम हिस्से में इस ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा के गवाह बनने वाले युवाओं और बच्चों से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा, मैं हर एक बच्चे और युवा को एक मैसेज देना चाहता हूं। उन्होंने कहा, अगर आप कोशिश करते हैं और अपना भविष्य अच्छे से बनाते हैं तो आपके साथ-साथ हमारे देश का भविष्य भी अच्छा बनेगा। केवल एक बात अपने मन में रखिए, आकाश की कभी सीमा नहीं होती (sky has never the limits)। यह बात हमेशा अगर अपने मन में रखी, तो आप आगे बढ़ेंगे। आपके साथ-साथ देश का भविष्य भी शानदार होगा। बस मेरा यही मैसेज है।

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शुभांशु शुक्ला और पीएम मोदी की बातचीत - फोटो : एएनआई
भावनाओं का ज्वार... भारत अब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंच चुका है
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भारत के तिरंगे की अहमियत बताते हुए शुभांशु शुक्ला ने कहा, प्रधानमंत्री जी मैं बहुत भावुक होने के साथ-साथ खुश भी हूं कि मुझे आज आपसे और आप के माध्यम से 140 करोड़ देशवासियों से बात करने का मौका मिला। जो तिरंगा आप मेरे पीछे देख रहे हैं, यह कल से पहले नहीं था। ISS पहुंचने के बाद हमने यहां पर पहली बार तिरंगा लगाया। यह मुझे बहुत भावुक करता है। देखकर अच्छा लगता है कि भारत अब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंच चुका है। शुभांशु की इस बात पर पीएम मोदी ने उन्हें और सभी साथियों को मिशन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, 'शुभांशु, हम सबको आपकी वापसी का इंतजार है। अपना ध्यान रखिए, मां भारती का सम्मान बढ़ाते रहिए।' दोनों ने अपनी चर्चा का अंत 'भारत माता की जय!' उद्घोषणा के साथ किया।
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एक्सिओम-4 मिशन पर आईएसएस जाने वाले भारत के शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य साथी। - फोटो : अमर उजाला
कौन हैं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और एक्सिओम-4 मिशन पर उनके साथी
शुभांशु ने 2006 में भारतीय वायुसेना में लड़ाकू पायलट के रूप में करियर शुरू किया था। उन्हें 2019 में गगनयान मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया। 2019 से 2021 के बीच उन्होंने रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट प्रशिक्षण केंद्र में मूलभूत प्रशिक्षण लिया। इसके बाद 2025 में उन्होंने स्पेसएक्स में अपना प्रशिक्षण पूरा किया। शुभांशु के साथ एक्सिओम-4 मिशन पर तीन देशों के अंतरिक्ष यात्री ISS गए हैं। इनमें पोलैंड के स्लावोश उजनान्स्की-विस्निएवस्की, हंगरी के टोबूर कापू और मिशन कमांडर पेग्गी व्हिटसन भी शामिल हैं। यह दल दो हफ्ते तक कई अहम वैज्ञानिक प्रयोग करेगा। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर राकेश शर्मा 1984 में तत्कालीन सोवियत संघ के स्पेस मिशन पर अंतरिक्ष गए थे। राकेश इस खास उपलब्धि को हासिल करने वाले पहले भारतीय बने थे।

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