इसे लेकर अमर उजाला ने पाठको से पूछा कि उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में क्या चुनावी रैलियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा देना चाहिए? जवाब में 83.64 फीसदी लोगों ने माना कि चुनावी रैलियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए, जबक सिर्फ 16.36 फीसदी लोग ही इससे सहमत नहीं थे।
नया साल यानी 2022 उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए सबसे अहम है। जल्द ही यहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा, सपा, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दल इसके लिए कमर भी कस चुके हैं। एक के बाद एक क्षेत्रीय और राष्ट्रीय कद के नेता यहां प्रचार करते नजर आ रहे हैं। चुनावी रैलियों में काफी भारी मात्रा में भीड़ उमड़ रही है। चुनाव आयोग ने भी कहा कि चुनाव समय से ही होंगे। हालांकि, इस दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा।
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इसे लेकर अमर उजाला ने पाठको से पूछा कि उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में क्या चुनावी रैलियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा देना चाहिए? जवाब में 83.64 फीसदी लोगों ने माना कि चुनावी रैलियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए, जबक सिर्फ 16.36 फीसदी लोग ही इससे सहमत नहीं थे।
भाजपा की सबसे ज्यादा रैलियां हो रहीं
इस वक्त सबसे ज्यादा रैलियां भारतीय जनता पार्टी की हो रहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम समेत कई केंद्रीय मंत्री चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी चुनावी यात्रा पर हैं। ऐसे में साफ है कि रैलियों पर किसी भी तरह का प्रतिबंध लगे, उससे पहले भाजपा ज्यादा से ज्यादा रैलियां कर लेना चाहती है।
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समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी प्रचार में जुटी
भाजपा के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेता भी चुनाव को लेकर काफी सतर्क हैं। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव खुद हर रोज चुनावी सभा कर रहे हैं। इसके अलावा सपा के अन्य बड़े नेताओं की रैलियां भी लगातार जारी हैं। इसी तरह कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी लड़की हूं लड़ सकती हूं अभियान के तहत रैलियां और मैराथन करवा रहीं हैं। प्रियंका भी लगातार सभाओं को संबोधित कर रहीं हैं।