कोलकाता में विपक्षी नेताओं के एक मंच पर आने के बाद उन्हें जनविरोधी और देश विरोधी कहने वाले पर शिवसेना ने निशाना साधा है। शिवसेना ने कहा है कि 22 पार्टियों के एक साथ एक मंच पर आने से उन्हें (भाजपा) बुखार आ गया है। भाजपा को यह भ्रम नही पालना चाहिए कि वे ‘अजर अमर’ हैं।
पार्टी के मुखपत्र में ‘तोप क्यों कंपकंपाई’ शीर्षक के तहत प्रकाशित संपादकीय में कोलकाता में हुई विपक्षी पार्टियों की रैली को लेकर शिवसेना ने अपना मत जाहिर किया है। शिवसेना ने कहा है कि विपक्षी मंच पर मौजूद ज्यादातर पार्टियां और ममता बनर्जी भी एक समय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा का हिस्सा थीं। मोदी सरकार देश की दुश्मन नहीं है, लेकिन उन्हें इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि वे अमर हैं।
शिवसेना ने हालांकि विपक्षी दलों के मंच से दूरी बनाई है लेकिन केंद्र और महाराष्ट्र में अपनी सरकार की आलोचना को अपना अधिकार बताया है। ममता बनर्जी ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को भी अपनी रैली के लिए आमंत्रित किया था। संपादकीय में लिखा गया है कि जो भी लोग ममता बनर्जी के मंच पर मौजूद थे, वे सभी धर्मनिरपेक्ष थे। हमारी विचारधारा हिंदुत्व है और हम लोग राम मंदिर और समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर अपने स्टैंड पर कायम हैं।
कोलकाता की रैली में शिवसेना का राजनीतिक स्टैंड मिक्स नहीं हो पाता। शिवसेना ने आगे कहा कि पीएम ने टैंक पर यात्रा के दौरान स्पीच दी थी। तो फिर 22 पार्टियों के एक मंच पर आने से उन्हें बुखार क्यों आ गया है। जिस तरह भाजपा को जनता के वोटों के आधार पर सत्ता में बने रहने का अधिकार है, उसी तरह विपक्ष को भी सरकार को उजागर करने और हराने का अधिकार है।