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दादरा एवं नगर हवेली लोकसभा उपचुनाव: 51 हजार मतों से जीतीं कलाबेन डेलकर, महाराष्ट्र के बाहर शिवसेना की पहली सांसद

Tue, 02 Nov 2021 09:12 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

मोहन डेलकर के निधन के चलते खाली हुई दादरा एवं नगर हवेली सीट पर हुए उपचुनाव में उनकी विधवा कलाबेन डेलकर ने जीत हासिल की है। उन्होंने यह चुनाव शिवसेना के टिकट पर लड़ा था और इस जीत के साथ वह पार्टी की महाराष्ट्र से बाहर पहली सांसद बन गई हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल
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विस्तार
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केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से सात बार सांसद रहे मोहन डेलकर की पत्नी कलाबेन डेलकर अब यहां की अगली सांसद होंगी। मंगलवार को सामने आए उपचुनाव के परिणामों में कलाबेन ने यहां 52 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की है। मोहन डेलकर की मौत इसी साल फरवरी में संदिग्ध हालात में मुंबई के एक होटल में हुई थी, जिसके चलते यहां उपचुनाव करवाना पड़ा था।

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कलाबेन डेलकर के सामने चुनावी मैदान में भाजपा के महेश गावित थे, जिन्हें उन्होंने 51,269 मतों के अंतर से हराया। यहां खास बात यह है कि महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर (महा विकास अघाड़ी) सरकार बनाने वाली शिवसेना को पहली बार महाराष्ट्र के बाहर किसी लोकसभा सीट पर जीत नसीब हुई है। कलाबेन डेलकर शिवसेना की महाराष्ट्र से बाहर पहली सांसद बन गई हैं। 

यह जीत नए विकास पर्व का शंखनाद: आदित्य ठाकरे
शिवसेना नेता और पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने दादरा एवं नगर हवेली में कलाबेन डेलकर की सफलता को अन्याय और तानाशाही के खिलाफ जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि यह नए विकास पर्व का शंखनाद है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि 60 के दशक में गठित हुई शिवसेना ने महाराष्ट्र में अपने पैर जमाने के बाद हिंदुत्व का चोला ओढ़कर अन्य राज्यों में भी पांव पसारने की कोशिश की थी।
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महाराष्ट्र के बाहर कुछ ऐसा रहा शिवसेना का प्रदर्शन
महाराष्ट्र के बाहर शिवसेना को साल 1991 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहली बार कामयाबी मिली थी जब बाहुबली पवन पांडेय अकबरपुर से विधायक चुने गए थे। चुनाव जीतने के बाद पवन उस वक्त यूपी में पार्टी का सबसे मजबूत चेहरा बनकर उभरे थे। उनके नेतृत्व में शिवसेना ने गोरखपुर, बलिया, मेरठ, वाराणसी और लखनऊ के स्थानीय निकाय चुनाव में भी अपनी मौजदूगी दर्ज कराई थी।

लेकिन उसके बाद हुए चुनाव में पवन पांडेय दोबारा नहीं जीत सके। इसी दौरान मायावती सूबे की मुख्यमंत्री बनीं तो उन्होंने अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को निशाना बनाना शुरू किया। इससे बाहुबली पवन को भागकर मुंबई आना पड़ा और यूपी में शिवसेना नेतृत्व नहीं होने से पार्टी का विस्तार थम गया। यूपी विधानसभा में शिवसेना की उपस्थिति दर्ज होने के बाद शिवसेना की यह दूसरी बड़ी उपलब्धि है।

कलाबेन के पति मोहन डेलकर का ऐसा रहा था राजनीतिक सफर
मोहन डेलकर पहली बार 1989 में इस लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़कर सांसद बने थे। इसके बाद 1991 और 1996 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। जबकि, 1998 के चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर जीते थे। हालांकि, इसके कुछ ही दिन बाद उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी और 1999 का लोकसभा चुनाव फिर निर्दलीय के रूप में जीता।

इसके उन्होंने अपनी पार्टी 'भारतीय नवशक्ति पार्टी' का गठन किया और 2004 का चुनाव जीता। 2009 में वह फिर कांग्रेस में शामिल हुए लेकिन 2019 में उन्होंने एक बार फिर इस्तीफा दे दिया था। 2019 में उन्होंने फिर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था और जीतकर संसद पहुंचे थे। इसके बाद साल 2020 में वह जदयू (जनता दल यूनाइटेड) में शामिल हो गए थे।

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