मानहानि केस में दो साल की सजा के खिलाफ राहुल गांधी ने सूरत की सेशंस कोर्ट में याचिका दायर की है। इस दौरान कांग्रेस के कई बड़े नेता भी उनके साथ मौजूद रहे। कांग्रेस की इस रणनीति पर भाजपा ने सवाल उठाते हुए कहा था कि ऐसा करके भाजपा न्यायपालिका पर अनुचित दबाव बना रही है। वहीं, भाजपा के इन आरोपों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पलटवार किया है। उन्होंने इन आरोपों को बेतुका करार दिया। उन्होंने कहा कि अदालत में उपस्थित होने वाला हर व्यक्ति दबाव का स्त्रोत नहीं है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आरोप के बारे में पूछे जाने पर थरूर ने कहा कि यह एक बेतुका आरोप है। अदालत में कौन उपस्थित होता यह दबाव का स्रोत नहीं है। इस दौरान बिना नाम लिए भाजपा पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि अगर न्यायपालिका पर दबाव का कोई स्रोत है, तो मुझे लगता है कि हम सभी अनुमान लगा सकते हैं कि यह कहां से आ सकता है।
गांधी विपक्षी दल के नेता इसलिए ताकत दिखाना उचित
शशि थरूर ने आगे कहा कि राहुल गांधी एक प्रमुख विपक्षी दल के प्रमुख राजनीतिक नेता हैं। ऐसे में उनके समर्थन में ताकत का प्रदर्शन करना उचित है। हालांकि अंत में अदालत कक्ष के अंदर वकीलों के तर्कों की मजबूती ही प्रबल होती है। उन्होंने कहा कि अदालत में कौन आता है, इससे मामले का फैसला नहीं होगा। अदालत में दिए जाने वाले तर्क मामले में फैसला देने में सहायक होते हैं। यही वह कारण है कि हमारे वकीलों को मामले को समझने और मजबूत बचाव के लिए अपील दाखिल करने में एक सप्ताह का समय क्यों लगा।
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2019 के मामले में अपनी सजा के खिलाफ सोमवार को सूरत सत्र अदालत में अपील दायर की। अब अदालत 13 अप्रैल को मामले की सुनवाई करेगी। फिलहाल अदालत ने उन्हें जमानत दे दी है।
क्या बोले थे- किरेन रिजिजू?
इससे पहले, कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के साथ सूरत की अदालत में कांग्रेस नेताओं के जाने की रणनीति न्यायपालिका पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश का एक तरीका था।
संबित पात्रा ने भी साधा निशाना
संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, 'राहुल गांधी अपने परिवार के सदस्य, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ सूरत जा रहे हैं। यहां वो कोर्ट द्वारा सुनाए गए दो साल की सजा के खिलाफ अपील के नाम पर हुड़दंग की कोशिश करेंगे।' पात्रा ने आगे कांग्रेस और राहुल से सवाल किया कि क्या ये न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है?
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आखिर हंगामे की जरूरत क्या है?
संबित पात्रा ने कहा, 'राहुल गांधी को ओबीसी समाज के लोगों के लिए जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल करने, ओबीसी समाज को अपमानित करने के लिए दोषी करार कर दंडित किया। उनकी सदस्यता रद्द हुई। ये कार्रवाई यूपीए सरकार के दौरान बनाए गए कानून के तहत ही हुई है। अब ये सभी सजा के खिलाफ याचिका दायर करने जा रहे हैं। वहां हंगामा करने जा रहे हैं। इस हंगामे की आखिर जरूरत क्या है? ये लोग सीधे तौर पर नौटंकी करने जा रहे हैं।'
क्या है मामला?
दरअसल, राहुल गांधी पर 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान 'मोदी सरनेम' पर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगा था। इसी मामले में राहुल पर गुजरात के भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था। जिसपर सुनवाई करते हुए पिछले दिनों सूरत की एक अदालत ने अपना फैसला सुनाया। राहुल गांधी को इस मामले में दोषी छठराते हुए दो साल की सजा सुना दी। नियम के अनुसार, अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या इससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता चली जाती है। राहुल के साथ भी ऐसा ही हुआ। अगले ही दिन लोकसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता जाने का आदेश जारी कर दिया था।
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