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Medicine Price: 'NLEM के तहत आने वाली दवाओं के दाम घटे, सालाना 3500 करोड़ की बचत', मंडाविया का खरगे पर पलटवार

Mon, 03 Apr 2023 05:45 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, सरकार ने अब तक 870 आवश्यकत दवाओं में से 651 की अधिकतम कीमतों को अधिसूचित कर दिया है, जिससे राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची (एनएलईएम) के तहत आने वाली दवाओं की कीमत कम हुई है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया - फोटो : ट्विटर/डॉ.मनसुख मंडाविया
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विस्तार
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडालविया ने सोमवार को कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे पर निशाना साधा। मंडाविया ने दावा किया कि सरकार द्वारा ज्यादातर जरूरी दवाओं की कीमतों की सीमा तय करने से उपभोक्ताओं की सालाना करीब 3,500 करोड़ रुपये की बजत होगी। दरअसल, एक दिन पहले कुछ आवश्यक दवाओं की कीमतों में वृद्धि को लेकर खरगे ने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष किया था और कहा था कि आपने लोगों की जेब काटने के लिए 'सुपारी' ली है। 

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कांग्रेस नेता को दावों को खारिज करते हुए मंडाविया ने सिलसिलेवार कई ट्वीट किए। एक ट्वीट में उन्होंने कहा, सरकार ने अब तक  870 आवश्यकत दवाओं में से 651 की अधिकतम कीमतों को अधिसूचित कर दिया है, जिससे राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची (एनएलईएम) के तहत आने वाली दवाओं की कीमत कम हुई है। 

यह भी पढ़ें: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने उत्तराखंड को दी सौगात, 182 करोड़ की चार परियोजनाओं का किया शिलान्यास
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खरगे के ट्विटर हैंडल को टैग करते हुए मंडाविया ने कहा कि अब तक 870 आवश्यक दवाओं में से 651 की नई अधिकतम कीमतों को अधिसूचित किया गया है। इसके कारण दवाओं के स्वीकृत अंतिम कीमत में औसतन 16.62 फीसदी की कमी आई है। नतीजतन, उपभोक्ताओं को सालाना अनुमानित 3,500 करोड़ रुपये की बचत होगी।

उन्होंने कहा कि औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के प्रावधानों के अनुसार हर साल फार्मा कंपनियां डब्ल्यूपीआई के हिसाब से दवाओं की कीमतों में वृद्धि या कमी करती हैं। लेकिन नवंबर 2022 में सरकार ने आवश्यक दवाओं की सूची और कीमतों को संशोधित किया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, कंपनियां एक अप्रैल 2023 से दवाओं के दाम बढ़ा सकती हैं।

मंडाविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाए जा रहे जन औषधि अभियान से आपूर्ति पक्ष में हस्तक्षेप हुआ है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा पैदा हुई है जिसने कंपनियों को कीमतें बढ़ाने से रोका। 

रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने कहा, सितंबर 2022 में, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) में बदलाव करते हुए 870 दवाओं को जोड़ा। इन दवाओं को औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के तहत निर्धारित किया गया था और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने इन दवाओं के वैध अधिकतम मूल्यों में संशोधन करना शुरू कर दिया था। 870 आवश्यक दवाओं में से 651 में नई उच्चतम कीमतें हैं, जिसके परिणामस्वरूप औसतन 16.62 फीसदी की कमी आई है। इसलिए, 12.12 फीसदी की अपेक्षित वृद्धि के बजाय, इन 651 आवश्यक दवाओं के वैध उच्चतम मूल्यों में अनुमानित कमी औसतन 6.73 फीसदी है।
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मंत्रालय ने कहा, इसका मतलब है कि 1 अप्रैल, 2023 से डब्ल्यूपीआई के कारण आवश्यक दवाओं की कीमतों में वृद्धि की भरपाई 651 आवश्यक दवाओं की वैध अधिकतम कीमतों में औसत कमी से की जाएगी। कुल मिलाकर यह खबर भारतीय पाठकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आवश्यक दवाओं की कीमतों को प्रभावित करती है, जिसका उनके स्वास्थ्य देखभाल खर्चों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

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