मराठा दिग्गज का जन्म पुणे जिले के बारामती में 12 दिसंबर, 1940 को श्री गोविंदराव पवार और श्रीमती शारदाबाई पवार के यहां हुआ। पवार के पिता बारामती फार्मर्स कोऑपरेटिव में काम किया करते थे, जिसे सहकारी खेड़ी विक्री संघ के नाम से भी जाना जाता है। उनकी मां बारामती से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित केटवाड़ी स्थित उनके खेतों की देखभाल करती थी। शरद पवार के पांच भाई और चार बहनें हैं।
शरद पवार की प्रारंभिक शिक्षा महाराष्ट्र एजुकेशन सोसाइटी के तहत एक स्कूल से हुई। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय के तहत बृहन् महाराष्ट्र कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दाखिला लिया और यहां से अपनी पढ़ाई पूरी की। एक अगस्त, 1967 को शरद पवार ने प्रतिभा शिंदे से शादी की, जिनसे उनकी एक बेटी सुप्रिया सुले हुई। वर्तमान में सुप्रिया सुले बारामती सीट से सांसद हैं।
शरद पवार पढ़ाई में एक औसत छात्र थे, लेकिन वह शुरू से ही छात्र राजनीति में काफी सक्रिय थे। उनके द्वारा दिए जाने वाले उत्साहपूर्ण भाषण, उनकी गतिशील बोलने की क्षमता, उनके द्वारा खेल और बाहरी गतिविधियों को व्यवस्थित करना, उनके नेतृत्व संभालने वाले गुणों के शुरुआती संकेतक थे।
राजनीति के क्षेत्र में उनका पहला कार्य 1956 में गोवा मुक्ति आंदोलन के समर्थन में संगठन के विरोध में उनकी सक्रिय भागीदारी थी। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह बृहन महाराष्ट्र कॉमर्स कॉलेज (बीएमसीसी) में छात्र संघ का चुनाव लड़े और महासचिव के रूप में कार्य किया।
इस तरह राजनीति में उनका प्रवेश हुआ और वह युवा कांग्रेस के साथ जुड़े। जल्द ही उनकी मुलाकात यशवंतराव चव्हाण से हुई, जिन्हें आधुनिक महाराष्ट्र का वास्तुकार माना जाता है। चव्हाण ने एक नेता के रूप में पवार की क्षमता को पहचाना और अंततः शरद पवार युवा कांग्रेस के नेता बन गए। वह राज्य की राज्य कांग्रेस समिति के सदस्य भी थे।
शरद पवार 1967 में बारामती का प्रतिनिधित्व करते हुए महाराष्ट्र विधानसभा में पहुंचे थे। 1972 और 1978 के चुनाव में भी शरद पवार चुनाव जीते। यशवंत राव चव्हाण के संरक्षण में राजनीति शुरू करने वाले पवार ने राजनीति में पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा।
वसंतदादा पाटील राज्य के मुख्यमंत्री थे, लेकिन शरद पवार ने पहली बार कांग्रेस पार्टी को तोड़कर कुछ विधायकों के साथ प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट बनाई थी। वसंत दादा पाटील भी शरद पवार के संरक्षक थे और शरद पवार ने 12 विधायकों के साथ वसंत दादा पाटील के खिलाफ जाते हुए 18 जुलाई 1978 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली थी।
तब वसंत दादा ने इसे शरद पवार द्वारा पीठ में घोंपा गया छुरा बताया था। पवार की यह सरकार कांग्रेस (एस) और जनता पार्टी के समर्थन से बनी थी। बाद में 1980 में सत्ता में वापस आने के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस सरकार को बर्खास्त कर दिया था। यह पवार का राजनीति में पहला विश्वासघात था।
1980 में महाराष्ट्र में कांग्रेस (आई) फिर सत्ता में आई। बैरिस्टर एआर अंतुले राज्य के मुख्यमंत्री, विधानसभा में पवार विपक्ष के नेता बने। इसके बाद 1987 में शरद पवार ने औरंगाबाद में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौजूदगी में फिर कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की।
26 जून 1988 को राज्य में कांग्रेस के बहुमत पाने पर शरद पवार राज्य के मुख्यमंत्री बने। 1989 के आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र में शानदार प्रदर्शन किया। 4 मार्च 1990 में शरद पवार तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने।
1991 में राजीव गांधी के हत्या के बाद दिल्ली में केंद्र में सरकार बनने की दशा में शरद पवार प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों में थे। कहा जाता है कि सोनिया गांधी का वीटो लगने के बाद उनके स्थान पर पीवी नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री बने थे। सूत्र बताते हैं कि पवार को यह दर्द सालता रहा।
पवार को 26 जून 1991 को देश के रक्षामंत्री और सुधाकर नाईक को राज्य के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीति के जानकार बताते हैं पवार के खेमे ने सुधाकर नाईक सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर दी। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने शरद पवार को चौथी बार राज्य का मुख्यमंत्री बनाकर भेजा।
1997 में शरद पवार बारामती लोकसभा से चुनकर राष्ट्रीय राजनीति में आए थे। सीताराम केसरी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और हार गए। पवार ने रिपब्लिकन पार्टी और समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण बनाया। कांग्रेस राज्य में 48 में से 37 सीटें जीतने में सफल रही। शरद पावर 12वीं लोकसभा में विपक्ष के नेता चुने गए।
कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के इटली मूल के होने के कारण शरद पवार ने फिर भारतीय मूल के व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के नाम पर कांग्रेस से बगावत की। कांग्रेस पार्टी ने तीनों नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।
यह बगावत उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा, तारिक अनवर के साथ की। तीनों नेताओं ने मिलकर जून 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) बनाई। राज्य विधानसभा में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। तब शारद पवार की एनसीपी ने कांग्रेस के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाई। कांग्रेस के नेता विलास राव देशमुख कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री बने।
2004-2014 तक वह यूपीए सरकार में केन्द्र सरकार में मंत्री बने। पिछले 20 साल एनसीपी के कैरियर में पवार का साथ निभाने वाले पीए संगमा और बाद में तारिक अनवर ने भी साथ छोड़ दिया। इतना ही नहीं तमाम राजनीतिक अवसरों पर वह अपने हिसाब से चलते रहे। पवार की यह राजनीति लगातार कभी मजबूत भरोसा नहीं बना सकी।