सरकारी योजनाओं को किस तरह कागजों पर दौड़ाया जा सकता है, कुपोषण से जूझ रहा शाहजहांपुर जिला इसकी मिसाल है। स्थिति कितनी विकराल है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य के 2015 में हुए सबसे ताजा सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक 36 हजार से ज्यादा कुपोषित बच्चों में 49.3 फीसदी की लंबाई और 23.6 फीसदी बच्चों का वजन कम है।
यह स्थिति काफी हद तक संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने वाली जननी सुरक्षा योजना की विफलता से जुड़ी हुई है जिसका भयावह पहलू यह है कि इस जिले में 70 फीसदी से ज्यादा कुपोषित बच्चों का प्रसव घरों पर ही हुआ है। पड़ताल में पता चला कि इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज (आईसीडीएस) स्कीम की रिपोर्ट के मुताबिक रेड जोन में शामिल हाई रिस्क श्रेणी के इस जिले में कुपोषितों बच्चों की तादाद कम करने को सरकारी तंत्र ने कोई ठोस पहल नहीं की।