वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने बुधवार को प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर मामलों को सूचीबद्ध करने और उच्चतम न्यायालय में अन्य पीठों को पुन: आवंटन करने की कुछ घटनाओं पर नाराजगी जाहिर की। साथ ही उन्होंने जल्द से जल्द इस दिशा में सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।
दवे ने लिखा खुला पत्र
दरअसल, हाल ही में प्रशांत भूषण सहित कुछ वकीलों ने अदालत संख्या दो की कारण सूची से अचानक नाम हटाए जाने का आरोप लगाया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एस के कौल ने आश्चर्य जताया था। इसी के एक दिन बाद दवे का नाराजगी भरा खुला पत्र भी सामने आ गया। बता दें, ये मामले हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की पदोन्नति और स्थानांतरण पर कॉलेजियम की सिफारिशों पर कार्रवाई करने में केंद्र की कथित देरी से संबंधित हैं।
मैं भारत के उच्चतम न्यायालय की...
सुप्रीम कोर्ट बार एसोशिएसन के पूर्व अध्यक्ष दवे ने कहा, 'मैं भारत के उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा मामलों को सूचीबद्ध किए जाने के बारे में कुछ घटनाओं से बहुत दुखी हूं।' उन्होंने कहा कि कुछ मामले संवेदनशील प्रकृति के होते हैं, जिनमें मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और वैधानिक और संवैधानिक संस्थानों का कामकाज शामिल होता है।
इसलिए उठाया यह कदम
दवे ने खेद जताया कि उन्हें खुला पत्र लिखना पड़ा क्योंकि कुछ वकीलों द्वारा सीजेआई से व्यक्तिगत रूप से मिलने के प्रयासों का कोई नतीजा नहीं निकला। उन्होंने शीर्ष अदालत में मामलों को सूचीबद्ध करने से संबंधित संवैधानिक योजनाओं एवं नियमों और मास्टर ऑफ रोस्टर के रूप में सीजेआई की प्रशासनिक शक्ति का भी उल्लेख किया।
दवे ने मामलों को एक पीठ से दूसरी पीठ में स्थानांतरित करने पर सुप्रीम कोर्ट के अन्य वकीलों द्वारा साझा किए गए उदाहरणों के बारे में लिखा। उन्होंने कहा, 'लेकिन यह उल्लेख करना अनुचित नहीं होगा कि इन मामलों में मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और वैधानिक और संवैधानिक संस्थानों के कामकाज से जुड़े कुछ संवेदनशील मामले शामिल हैं।' उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं सही नहीं हैं। उन्होंने सीजेआई से इस पर तत्काल गौर करने और सुधारात्मक कदम उठाने' का आग्रह किया।