केंद्र सरकार ने 26 आईएएस अफसरों को सचिव या समकक्ष अधिकारियों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इनमें जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम का नाम भी शामिल है। सुब्रह्मण्यम को पीएम नरेंद्र मोदी की टीम 'अनुच्छेद 370' का सदस्य माना जाता है। वे मोदी के उन 9 रत्नों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने 30 दिन में करीब चार दर्जन बैठकें कर 'अनुच्छेद 370' की विदाई तय कर दी थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के गलियारों में अब चर्चा है कि 1987 बैच के आईएएस अधिकारी सुब्रह्मण्यम को पीएमओ में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। वे पहले भी यहां बतौर संयुक्त सचिव काम कर चुके हैं।
बता दें कि बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्तियों की समिति ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के 26 अधिकारियों को भारत सरकार के सचिव या उसके समकक्ष अफसरों के रूप में सूचीबद्ध किया है। जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम का नाम भी इस सूची में शामिल है। पीएम नरेंद्र मोदी की वह कोर टीम जिसने अनुच्छेद 370 और 35A पर काम किया था, सुब्रह्मण्यम भी उसका हिस्सा थे। मिशन 370 में इनके योगदान को भी कम नहीं कहा जा सकता।
बताया जाता है कि जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली से लेकर अभी तक की जो परिस्थियां बनी हैं, उनमें सुब्रमणयम की अहम भूमिका रही है। ये पीएमओ में संयुक्त सचिव भी रहे हैं। कश्मीर को लेकर इनकी महारत से मोदी बखूबी परिचित हैं। इन्हें 2018 में जेएंडके भेजा गया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ के गृह सचिव के पद पर भी काम किया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम करने की इन्हें खासी महारत हासिल है। नक्सलियों को मार गिराने या उनके आत्मसमर्पण को लेकर सुब्रमण्यम ने एक विशेष नीति तैयार की थी। नक्सली विचारधारा को खत्म करने के लिए भी उन्होंने कई योजनाओं को जमीन पर उतारा।
खास बात है कि बीवीआर सुब्रमण्यम की जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव के रूप में जब नियुक्ति हुई, तो उसके आदेश रात को जारी हुए थे। साल 2018 में 19 जून की रात तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने टेलीफोन पर सुब्रमण्यम के साथ बातचीत की थी। केंद्रीय गृहमंत्री ने सुब्रमण्यम को बताया कि उन्हें जम्मू-कश्मीर जाना है, उन्हें वहां का मुख्य सचिव बना दिया गया है। कैबिनेट सचिव ने भी रातों रात सुब्रमण्यम का डेपूटेशन ऑर्डर जारी कर दिया था। बीवीआर सुब्रह्मण्यम को पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) में काम करने का खासा अनुभव हासिल है।
मिशन कश्मीर को लेकर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, विदेश मंत्री एस.जयशंकर, राज्यपाल सत्यपाल मलिक, कानून और न्याय सचिव आलोक श्रीवास्तव, तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा, एनएसए अजीत दोभाल, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, आईबी चीफ अरविंद कुमार व रॉ प्रमुख सामंत गोयल आदि के साथ मिलकर अनुच्छेद 370 की विदाई सुनिश्चित की थी।