भारतीय सेना के हथियार
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संसद का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो गया है। इस सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण से हुई। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में कहा कि सरकार की नीतियों की वजह से डिफेंस सेक्टर में विशेषकर रक्षा उत्पादन में देश की आत्म-निर्भरता लगातार बढ़ रही है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ 83 एलसीए तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट के निर्माण हेतु अनुबंध किए गए हैं। सरकार ने ऑर्डिनेन्स फैक्ट्रियों को सात डिफेंस PSUs का रूप देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हमारा लक्ष्य है कि हमारी सेनाओं की जरूरत का सामान भारत में ही विकसित हो तथा भारत में ही निर्मित हो।
इससे पहले प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साल अक्तूबर में विजयादशमी पर्व के दिन रक्षा क्षेत्र की सात कंपनियां देश को समर्पित करते हुए कहा था कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश के प्रमुख लक्ष्यों में शक्तिशाली सेनाओं में से एक के रूप में उभरना और देश में एक आधुनिक रक्षा उद्योग को अपने दम पर विकसित करना है।
डीआरडीओ, डीपीआई के निदेशक डॉ. एनके आर्य (फाइल फोटो)
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रक्षा क्षेत्र में भारत किस तरह आत्मनिर्भर बन रहा है?
भारत में रक्षा उपकरणों के बड़े निर्माण केंद्र हैं और साथ ही इससे जुड़े रिसर्च के संगठन भी हैं। डिफेंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) भी इन्हीं में से एक है। लेकिन कई कारणों से भारत वैश्विक रक्षा बाजार में रक्षा उत्पादक देश के तौर पर आगे नहीं बढ़ पाया था। यहां तक कि भारत की अपनी रक्षा की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही थीं। चीन और पाकिस्तान दोनों तरफ के खतरे के मद्देनजर लंबे समय से भारत हथियारों के आयात के मामले में टॉप के देशों में शामिल रहा है। लिहाजा सरकार ने आत्मनिर्भर होने की दिशा में कदम बढ़ाया।
रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बीते साल 21 दिसबंर को उत्तराखंड के भाजपा की संकल्प यात्रा को संबोधित करते हुए कहा था, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा उपकरणों का निर्यातक देश बन गया है। भारत पिछले सात सालों में न केवल रक्षा उपकरणों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है बल्कि हम 72 देशों को हथियार बेच भी रहे हैं। हम अभी 209 रक्षा उपकरणों का उत्पादन कर रहे हैं, जिन्हें पहले दूसरे देशों से खरीदते थे।
सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस
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ब्रह्मोस मिसाइलों का उत्पादन शुरू
रूस की मदद से हमने भारत में ऐसे ब्रह्मोस मिसाइलों का उत्पादन शुरू किया है, जो जमीन से, जंगी जहाजों और पनडुब्बियों से और आकाश में उड़ते वायुयानों से भी दागे जा सकते हैं। यह रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ने का ताजा सबसे बड़ा उदाहरण है। हाल ही में भारत और फिलीपींस के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत फिलीपींस भारत में रूसी सहयोग से बने तीन ब्रह्मोस मिसाइल खरीदेगा। 37.4 करोड़ रुपये के इस सौदे में भारत ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्रों के साथ उसके रख-रखाव की सामग्री और उसे इस्तेमाल करने वाले मानव संसाधनों का प्रशिक्षण भी फिलीपींस को मुहैया कराएगा।
नोएडा की कंपनी द्वारा सेना के लिए विकसित त्रिशूल, वज्र व अन्य हथियार।
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ओएफबी को भंग किया
पीएम मोदी ने अक्तूबर 2021 में जिन सात कंपनियों को देश को समर्पित किया, इन कंपनियों में पिस्टल से लेकर फाइटर प्लेन, गोला-बारूद और विस्फोटक, वाहन, हथियार और उपकरण, सैन्य सुविधा आइटम, ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स गियर, पैराशूट और सहायक उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा। इन सात कंपनियों के नाम म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड, आर्म्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड, एडवांस्ड वीपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, ट्रूप्स कम्फर्ट्स लिमिटेड, यंत्र इंडिया लिमिटेड, इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड और ग्लिडर्स इंडिया लिमिटेड हैं।
सरकार का ये कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र सरकार के मुताबिक पुनर्गठन से नई कंपनियों को नवाचार और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए अधिक स्वायत्तता मिलेगी।
सरकार ने ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड भंग कर इन नई कंपनियों के गठन का फैसला लिया। ओएफबी, पहले 41 आयुध कारखानों को नियंत्रित करती थी। इन आयुध कारखानों में टैंक, बम, रॉकेट, आर्टिलरी गन, एंटी-एयरक्राफ्ट गन, पैराशूट, छोटे हथियार, सैनिकों के लिए कपड़े और चमड़े के उपकरणों का उत्पादन होता था।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
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घरेलू बाजार में हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद
सरकार को उम्मीद है कि ये नई कंपनियां बेहतर क्षमता उपयोग के जरिए घरेलू बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएंगी और निर्यात के नए अवसर मिलेंगे। पिछले दो दशकों के दौरान, कई उच्च स्तरीय समितियों ने देश की रक्षा तैयारियों के लिए ओएफबी के कामकाज में सुधार और इसके कारखानों को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक इस पुनर्गठन का उद्देश्य आयुध कारखानों को उत्पादक और लाभदायक संपत्तियों में बदलना है जिससे उत्पाद श्रृंखला में सुधार हो सके, प्रतिस्पर्धा में वृद्धि और गुणवत्ता में सुधार हो ताकि रक्षा तैयारियों में देश की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जा सके।
भारतीय सेना के हथियार
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101 हथियारों और 351 रक्षा उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध
आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 101 हथियारों और 351 रक्षा उपकरणों और प्रणालियों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का भी फैसला किया है। पिछले साल अगस्त में सरकार ने 2024 तक 101 हथियारों और रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक लगाने का एलान किया। इसमें वाहक विमान, हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर, पनडुब्बियां, जहाज से चलने वाली क्रूज मिसाइलें, मिसाइल विध्वंसक, हल्के लड़ाकू विमान, लंबी दूरी की भूमि पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइल, बुनियादी ट्रेनर विमान और विभिन्न प्रकार के हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
सरकार का जोर खासकर गोला-बारूद के आयात पर प्रतिबंध लगाने की तरफ है क्योंकि यह हमारी रक्षा तैयारियों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार यह सुनिश्चित करने के भी प्रयास कर रही है कि छोटी और बड़ी दोनों तरह की कंपनियों सहित भारतीय रक्षा निर्माताओं को किसी तरह भी प्रक्रिया में समस्याओं का सामना न करना पड़े और रक्षा में कारोबार करने में आसानी रहे। भारत में हथियारों और आयुध प्रणालियों के उत्पादन के लिए विदेशी निवेशकों के निवेश की सीमा बढ़ाकर 74 प्रतिशत तक कर दी गई है।
भारतीय सेना का टैंक
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54,000 करोड़ के अनुबंधों को मंजूरी
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार ने परिवहन विमानों, टैंकों, हेलीकॉप्टरों, हवाई पूर्व चेतावनी प्रणालियों और काउंटर-ड्रोन हथियारों सहित स्थानीय रूप से उत्पादित हथियारों और प्रणालियों के साथ सेना की क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल लगभग 54,000 करोड़ के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं और कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
रक्षा मंत्रालय ने 27 अगस्त, 2021 को 1,349.95 करोड़ रुपये की लागत से 14 एकीकृत पनडुब्बी रोधी युद्धक और रक्षा सूट की खरीद के लिए महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड के साथ एक अनुबंध किया है। 'खरीदें और बनाएं (भारतीय)' श्रेणी के तहत एक भारतीय फर्म के साथ इस तरह के किए गए अनुबंध से रक्षा खरीद की दिशा में 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बढ़ावा मिला है। मंत्रालय का कहना है कि इससे प्रौद्योगिकी विकास और उत्पादन में स्वदेशी रक्षा उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। यह प्रणाली भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमता को बढ़ाएगी।
भारतीय सेना
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रक्षा निर्यात बढ़ा
सरकार के दावों के मुताबिक नीतिगत बदलावों के परिणामस्वरूप पिछले पांच सालों में रक्षा निर्यात में 325 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है। भारत का रक्षा निर्यात बढ़ा है। सरकार ने 2025 तक रक्षा निर्यात का लक्ष्य पांच अरब डॉलर का रखा है। इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की साझेदारी को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था
सरकार का यह भी दावा है कि डिफेंस सेक्टर में कई बड़े सुधार हो रहे हैं। लटकाने वाली नीतियों की जगह सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था की गई है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने रक्षा उत्पादन संस्थाओं के 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को प्रोत्साहित करने और सुविधाएं प्रदान करने के लिए कई प्रगतिशील उपाय अपनाए हैं।