भारत में शिक्षा की हालत कितनी बुरी है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि पूरे देश में ऐसे कई स्कूल हैं, जिनके पास खुद की इमारत नहीं है। ऐसे स्कूल खुले में चलते हैं। ऐसा ही एक स्कूल गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में है।
यह स्कूल तमाम सुविधाओं से वंचित है, जो बच्चों को मिलनी चाहिए। यहां बच्चे एक तंबूनुमा क्लास में बैठकर पढ़ते हैं। हालांकि बच्चों की इस परेशानी को देखते हुए गुजरात के पथ परिवहन निगम ने सेवामुक्त की गई पुरानी 24 बसों को क्लास रूम में तब्दील कर दिया है।
इस नए स्कूल में बच्चों को बैठने के लिए बेंच, लाइट, पंखे और अन्य जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई गई हैं। इस स्कूल में सुरेंद्र नगर में काम करने वाले नमक श्रमिकों के करीब 400 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।
बता दें कि गुजरात के इस स्कूल की कहानी एक डॉक्यूमेंट्री में भी दिखाई जा चुकी है। यूके की एक शिक्षिका लीजा हैडलौफ ने 'गोइंग टू स्कूल इन इंडिया' नाम से ये डॉक्यूमेंट्री बनाई थी। भारत यात्रा के दौरान लीजा ने 10 से ज्यादा राज्यों की यात्रा की थी।