उत्तर भारतीयों का गुजरात में विरोध हो रहा है
गुजरात के साबरकांठा में 14 महीने की बच्ची के साथ एक मजदूर ने बलात्कार किया था। आरोपी रविंद्र कुमार बिहार का रहने वाला है और पास की एक कंपनी में काम करता था। यह घटना 28 सितंबर की है जिसके बाद से राज्य में उत्तर भारत के लोग निशाने पर आ गए हैं। गुरुवार को इस विरोध-प्रदर्शन ने हिसंक रूप ले लिया। पुलिस ने बुधवार को दो ऐसे मामले दर्ज किए जिसमें उत्तर प्रदेश के लोगों को निशाना बनाया गया था।
दर्ज किए गए मामलों में से एक चांदलोडिया का है। यहां भीड़ ने एक आदमी पर हमला कर दिया। 23 साल के पीड़ित
ऑटोरिक्शा ड्राइवर केदारनाथ अग्रेही ने पुलिस को बताया कि चांदलोडिया पुल पर लगभग 25 लोगों ने उसपर हमला कर दिया। उसने बताया कि भीड़ सब्जी के ठेलों को पलट रही थी और लोगों पर हमला कर रही थी। जब उसने भागने की कोशिश की तो उसे रोककर, ऑटो की विंडशील्ड तोड़ी गई और उसकी पिटाई की। जिसमें उसकी उंगली टूट गई और कंधे पर फ्रैक्चर हो गया। पीड़ित यूपी के सुलतानपुर का रहने वाला है।
दूसरी घटना साबरमती की है। जहां एक महिला को भीड़ ने दौड़ा दिया। पीड़िता का नाम प्रतिमा कोरी है और वह त्वचा विशेषज्ञ हैं। उन्हें साबरमती में रेलवे ब्रिज के पास घर जाते समय चार लोगों ने रोका। वह लोग उनका पीछा करते हुए गालियां दे रहे थे। उनका कहना था कि यूपी और बिहार के लोग शहर से चले जाएं वरना उन्हें मार दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वह डरकर भागने लगीं। इसके बाद पु
लिस कंट्रोल रुम में उन्होंने फोन करके अपनी शिकायत दर्ज करवाई। प्रतिमा का जन्म यूपी के फैजाबाद में हुआ था।
दोनों ही मामलों में लोग चिल्ला रहे थे, 'बाहरी लोग राज्य छोड़ दें और गुजराती लोगों को बचाया जाना चाहिए।' पुलिस सूत्रों ने बताया कि भीड़ ने 8 गाड़ियां, एक लोडिंग रिक्शा और एक टू-वीलर को तोड़ दिया। वहीं केदारनाथ ने अपनी पिटाई करने वाली भीड़ में से 10 लोगों की पहचान की। जिन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। साबरकांठा में एक हफ्ते पहले और वडनगर में मंगलवार को उत्तर भारतीयों के खिलाफ प्रदर्शन किए गए।