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SC Updates: तमिलनाडु के पूर्व मंत्री बालाजी को फिलहाल राहत नहीं, अदालत ने जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

Mon, 12 Aug 2024 05:12 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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देश की सर्वोच्च अदालत ने तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी सेंथिल बालाजी की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है। सेंथिल बालाजी को बीते वर्ष धन शोधन के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था। शीर्ष अदालत में न्यायमूर्ति अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने मामले की सुनवाई की। अदालत में ईडी की तरफ से सरकारी वकील तुषार मेहता पेश हुए। इसके अलावा अदालत में सेंथिल बालाजी की तरफ से वर्षिठ वकील मुकुल रोहतगी और सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना। 

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शीर्ष अदालत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने द्रमुक नेता को जमानत देने का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि मुकदमें में देरी के लिए सेंथिल बालाजी जिम्मेदार हैं। उधर, मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि सेंथिल बालाजी बीते एक वर्ष से अधिक समय से जेल में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में ट्रायल के जल्द पूरा होने की भी कोई संभावनाएं नहीं हैं। इसके बाद अदालत ने सेंथिल बालाजी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अगर बालाजी को इस मामले में जमानत पर रिहा किया जाता है, तो इससे समाज में गलत संकेत जाएगा। 

बीते साल जून में हुई थी गिरफ्तारी
ईडी ने बीते साल जून में ईडी ने वी सेंथिल बालाजी को गिरफ्तार किया था। साल 2014 में अन्नाद्रमुक सरकार में परिवहन मंत्री रहते हुए बालाजी पर मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में पैसे लेकर लोगों को नौकरी देने के आरोप लगे थे। आरोप है कि बालाजी ने धन शोधन किया था। हालांकि, जे जयललिता के निधन के बाद बालाजी ने अन्नाद्रमुक को अलविदा कहा और साल 2018 में द्रमुक का दामन थाम लिया था। बालाजी की गिरफ्तारी पर जमकर हंगामा हुआ था और गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। बालाजी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी दिल की सर्जरी की गई। इसके बाद 17 जुलाई को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद सेंथिल बालाजी को तमिलनाडु की पुझल सेंट्रल जेल भेजा गया और तब से वे जेल में बंद हैं।
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अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व संचार प्रभारी की जमानत याचिका पर ईडी से मांगा जवाब

शीर्ष अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा है। आपको बता दें कि विजय नायर पर दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में धन शोधन का आरोप है। न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

अदालत ने क्या कहा?
पीठ ने कहा, ‘याचिकाकर्ता को करीब दो वर्ष पहले सीबीआई ने गिरफ्तार किया था और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा भी उन्हें लगातार हिरासत में रखा। इस वजह से नोटिस जारी किया जाता है।’ याचिकार्ता की तरफ से अदालत में वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी और विक्रम चौधरी पेश हुए। उन्होंने कहा कि नायर को लगभग दो वर्षों से जेल में रखा गया है। इस दौरान वकीलों ने मनीष सिसोदिया मामले का भी जिक्र किया। वकीलों ने कहा कि इस मामले में 353 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं और आज तक सुनवाई शुरू नहीं हुई। आपको बता दें कि विजय नायर को 13 नवंबर वर्ष 2022 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद निचली अदालत ने 29 जुलाई को नायर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। नायर ने निचली अदालत के फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दी थी। बीते वर्ष तीन जुलाई को उच्च न्यायालय ने भी धन शोधन के मामले में नायर और एक अन्य सह आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

झारखंड में अवैध खनन मामले में दो लोगों को मिली जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में अवैध खनन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो लोगों को जमानत दे दी। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मामले में आरोपी भगवान भगत और सुनील यादव को जमानत दे दी। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार दुबे, एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सोनम गुप्ता और एडवोकेट कौशिक मोइत्रा ने मामले में आरोपी भगवान भगत का प्रतिनिधित्व किया और कहा कि बिना किसी पूर्व निर्धारित अपराध के, आरोपी को हिरासत में नहीं छोड़ा जा सकता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 7 जुलाई, 2023 को भगत को गिरफ्तार किया था, उन पर अवैध खनन करने और दूसरे व्यक्ति के लिए अपराध की आय को लूटने में सहायता करने का आरोप है। भगत ने झारखंड हाईकोर्ट के 12 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत खारिज कर दी गई थी। डेढ़ साल की जांच के दौरान प्रतिवादी की ओर से जारी किए गए समन के अनुपालन में सातवीं बार पेश होने पर भगत को गिरफ्तार किया गया।

जबरन भूमि अधिग्रहण मामले में हिमाचल सरकार की अर्जी खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि सरकार ने मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हुए जबरन निजी संपत्ति का अधिग्रहण किया है। राज्य सरकार ने कथित तौर पर भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1984 के प्रावधानों का सहारा लिए बिना रक्कड़ से बसोली रोड के निर्माण के लिए भूमि का अधिग्रहण किया था। राज्य का दावा है कि उसने निर्माण के लिए भूमि का उपयोग करने के लिए भूमि मालिकों की मौखिक सहमति प्राप्त की थी, लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने राज्य के वकील से पूछा, आपके पास जमीन का एक टुकड़ा है और आपको सार्वजनिक उद्देश्य के लिए इसकी आवश्यकता है। आप आते हैं और कहते हैं कि उन्होंने स्वेच्छा से दान दिया है, इसलिए अधिग्रहण का सवाल ही नहीं उठता। 

आयकर आकलन पर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका पर विचार से इन्कार

सुप्रीम कोर्ट ने जाने-माने पर्यावरण वकील ऋत्विक दत्ता की उस याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020-21 के लिए उनके आयकर मूल्यांकन को फिर से खोलने के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने 29 मई, 2024 को दत्ता की याचिका को खारिज करते हुए आयकर (आईटी) अधिनियम की धारा 148ए(डी) के तहत एक आदेश को बरकरार रखा था। आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत, मूल्यांकन अधिकारी (एओ) को आय की गलत रिपोर्ट किए जाने पर कर रिटर्न का पुनर्मूल्यांकन करने का अधिकार है। 
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एनडीटीवी मामले में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती वाली ईडी की अर्जी खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती प्रवर्तन निदेशालय की उस याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने आरबीआई को फेमा उल्लंघन मामले में एनडीटीवी के समझौता आवेदनों पर विचार करने का निर्देश दिया था। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने कहा कि हस्तक्षेप का कोई मामला नहीं बनता। हाईकोर्ट ने 2018 के आदेश में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से कंपाउंडिंग कार्यवाही पर उठाई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिसने पहले कथित विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघन को चिह्नित किया था और एनडीटीवी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नवंबर 2015 में, ईडी ने समाचार संगठन को 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सुविधाओं का लाभ उठाते समय विदेशी मुद्रा नियमों का कथित रूप से उल्लंघन करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
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