सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायायलय के आदेश पर रोक लगाकर चंडीगढ़ पुलिस के कर्मियों को राहत दी है। उच्च न्यायालय ने पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था। आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने एक दंत चिकित्सक को अदालत में पेश होने से रोकने के लिए कथित तौर पर उसका अपहरण किया।
शीर्ष कोर्ट ने कहा- विस्तार से विचार करने की जरूरत
न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने दंत चिकित्सक मोहित धवन से जवाब मांगा है जिनकी याचिका पर उच्च न्यायालय ने यह आदेश दिया।
न्यायमूर्ति बोपन्ना ने कहा कि मामले पर विस्तार से विचार करने की जरूरत है और यही कारण है कि अदालत उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने का निर्देश दे रही है। पीठ ने चंडीगढ़ पुलिस को मामले के संबंध में सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल सहित रिकॉर्ड संरक्षित रखने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि वह आदेश पर रोक लगा रही है और मामले की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद करेगी।
उच्च न्यायालय का आदेश अधिकार क्षेत्र के बिना: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा, 'उच्च न्यायालय अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और पंजाब पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने का आदेश कैसे दे सकता है। यह पूरी तरह से किसी भी अधिकार क्षेत्र के बिना है।
पुलिस ने दायर किए विरोधाभासी हलफनामे: प्रशांत भूषण, वरिष्ठ अधिवक्ता
दंत चिकित्सक की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह उनके द्वारा देखे गए पुलिस ज्यादती के सबसे खराब मामलों में से एक है। उन्होंने कहा कि धवन ने नैरोबी की एक महिला द्वारा इलाज के लिए बकाया राशि की वसूली के लिए मुकदमा दायर किया था। इसके कारण दंत चिकित्सक को कथित तौर पर महिला को प्रदान किए गए अनुचित उपचार को लेकर फंसाया गया। उनके खिलाफ तीन अलग-अलग शिकायतें दर्ज की गईं और उनमें से दो में वह अग्रिम जमानत पाने में कामयाब रहे। तीसरे मामले में उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। लेकिन सुनवाई के दिन चंडीगढ़ अपराध शाखा पुलिस की एक टीम ने उनका अपहरण कर लिया, जबकि एक अन्य टीम ने अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। भूषण ने कहा कि उच्च न्यायालय का आदेश दिखाता है कि पुलिस ने विरोधाभासी हलफनामे दायर किए हैं।
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नैरोबी की महिला ने डॉक्टर पर लगाया था धोखाधड़ी का आरोप
शीर्ष अदालत ने 15 मार्च को कहा था कि वह चंडीगढ़ प्रशासन की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी। प्रशासन ने कहा कि यह मामला धवन से संबंधित है, जिनके खिलाफ नैरोबी की एक नागरिक द्वारा 2017-18 के दौरान धोखाधड़ी करने का आरोप लगाए जाने के बाद आपराधिक मामला दर्ज किया गया था, जब वह उनके क्लिनिक से दंत प्रत्यारोपण कराने के लिए भारत आई थी। मामले में जब धवन मजिस्ट्रेट की अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने गए, तो चंडीगढ़ पुलिस की टीम ने उनका कथित तौर पर अपहरण कर लिया, जिसने दावा किया कि उन्हें एक अन्य मामले के संबंध में गिरफ्तार किया गया था।
उच्च न्यायालय ने दिया था एसआईटी गठित करने का आदेश
उच्च न्यायालय ने तीन मार्च को पंजाब के डीजीपी से एक सप्ताह के भीतर एसआईटी गठित करने को कहा था। उच्च न्यायालय ने कहा था, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि इस मामले में न केवल न्याय प्रशासन में आम आदमी के विश्वास को हिलाने की क्षमता है, बल्कि यदि घटना, जैसा कि याचिकाकर्ता द्वारा आरोप लगाया गया है, सही पाया जाती है, तो पुलिस अधिकारियों का आचरण अदालतों द्वारा पारित आदेशों के कार्यान्वयन में हस्तक्षेप करके न्याय की दिशा को नष्ट करने के समान होगा।