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SC: 'कड़ी प्रतिस्पर्धा और अभिभावकों का दबाव छात्रों की आत्महत्या की मुख्य वजह', कोर्ट की 'सुप्रीम' टिप्पणी

Mon, 20 Nov 2023 09:38 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

SC: अदालत ने कहा, 'हम में से ज्यादातर लोग यह नहीं चाहेंगे कि कोई कोचिंग संस्थान हो, लेकिन स्कूलों की हालत भी तो देखें। कड़ी प्रतिस्पर्धा है और छात्रों के पास इन कोचिंग संस्थानों के अलावा कहीं जाने का विकल्प नहीं है।' 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों पर कड़ी प्रतिस्पर्धा और माता-पिता का दबाव देशभर में आत्महत्या के बढ़ते मामलों की मुख्य वजह है। शीर्ष अदालत तेजी से बढ़ रहे कोचिंग संस्थानों के नियमन (रेगुलेशन) और छात्रों की आत्महत्या के आंकड़ों का हवाला देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हालांकि, अदालत ने इसमें अपनी लाचारी जाहिर की और कहा कि न्यायपालिका ऐसी स्थिति में निर्देश पारित नहीं कर सकती है। 

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न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एवीए भट्टी की पीठ ने कहा, ये आसान चीजें नहीं हैं। इन सभी घटनाओं के पीछे माता-पिता का दबाव है। माता-पिता बच्चों पर ज्यादा दबाव बना रहे हैं। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, ऐसी स्थिति में अदालत निर्देश कैसे जारी कर सकती है। याचिका मुंबई के डॉक्टर अनिरुद्ध नारायण मालपानी की ओर से दायर की गई थी। उनकी ओर से अधिवक्ता मोहिनी प्रिया पेश हुईं। 

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, 'हम में से ज्यादातर लोग यह नहीं चाहेंगे कि कोई कोचिंग संस्थान हो, लेकिन स्कूलों की हालत भी तो देखें। कड़ी प्रतिस्पर्धा है और छात्रों के पास इन कोचिंग संस्थानों के अलावा कहीं जाने का विकल्प नहीं है।' 

अधिवक्ता प्रिया ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2020 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ये बताते हैं कि देशभर में 8.2 फीसदी छात्र आत्महत्या से मरते हैं। पीठ ने कहा कि वह इस स्थिति के बारे में जानती है और लेकिन निर्देश नहीं दे सकती है। इसने सुझाव दिया कि इसके बजाय याचिकाकर्ता को अपने सुझाव सरकार के साथ साझा करने चाहिए।  
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इसके बाद अधिवक्ता प्रिया ने उचित मंच पर जाने के लिए याचिका वापस लेने की मांग की, जिसे अदालत ने अनुमति दे दी। मालपानी ने प्रिया के जरिए दाखिल याचिका में भारत में तेजी से बढ़ रहे पैसे के भूखे उन निजी कोचिंग संस्थानों के संचालन को विनियमित करने के लिए उचित निर्देश की मांग की थी, जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान संयुक्त प्रवेश परीक्षा (आईआईटी-जेईई) और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) जैसी विभिन्न प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग प्रदान करते हैं।
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