अपनी याचिका में गोविंदाचार्य ने अदालत की कार्यवाही के ‘सीधे प्रसारण’ पर कॉपीराइट की सुरक्षा को लेकर यू-ट्यूब के साथ एक विशेष व्यवस्था के लिए निर्देश देने की मांग की थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर को गोविंदाचार्य की याचिका पर अपनी रजिस्ट्री को नोटिस जारी किया था।
भारत के सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ द्वारा अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए अपना प्लेटफॉर्म लाने की तैयारियों का दावा किए जाने के बीच सामने आया है कि इस समय बिना किसी तीसरे पक्ष के संसाधनों के उपयोग के अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के पास कोई बुनियादी ढांचा नहीं है। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के बाद से यूट्यूब पर अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की जाती है। शीर्ष अदालत के रजिस्ट्री विभाग ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व विचारक के.एन. गोविंदाचार्य की याचिका पर जवाब देते हुए ये जानकारी दी है।
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अपनी याचिका में गोविंदाचार्य ने वकील विराग गुप्ता के जरिए अदालत की कार्यवाही के ‘सीधे प्रसारण’ पर कॉपीराइट की सुरक्षा को लेकर यू-ट्यूब के साथ एक विशेष व्यवस्था के लिए निर्देश देने की मांग की थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर को गोविंदाचार्य की याचिका पर अपनी रजिस्ट्री को नोटिस जारी किया था।
इस पर जानकारी देते हुए रजिस्ट्रार ने एक हलफनामे में कहा कि शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री लगातार स्वपोषित, स्वत: स्फूर्त और आत्मनिर्भर लाइव-स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में काम कर रही है। बड़े पैमाने पर दर्शकों के लिए लाइव स्ट्रीमिंग सेवाओं की पेशकश करने के लिए तीसरे पक्ष के सहयोग पर निर्भरता अपरिहार्य है। रजिस्ट्री ने शीर्ष अदालत को बताया कि यह एक अस्थायी उपाय है। इसे लेकर कार्य प्रगति पर है और पूरी लाइव स्ट्रीमिंग को एक स्व-पोषित परितंत्र बनाने की दिशा में सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
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गौरतलब है कि हाल ही में मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने लाइव स्ट्रीमिंग के विभिन्न पहलुओं पर वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह की याचिका पर सुनवाई करते कहा था कि सुप्रीम कोर्ट अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए एक स्वतंत्र प्लेटफार्म बनाने पर विचार कर रहा है। जिससे कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पूरी प्रक्रिया को संस्थागत बनाया जा सके।
अपनी याचिका में वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि अदालती कार्यवाही की छोटी-छोटी क्लिप नियमित रूप से इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया साइटों पर बिना उचित संदर्भ के प्रसारित की जा रही हैं। ऐसी चीजों पर नियम बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सर्कुलेशन को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत अपराध बनाया जा सकता है।