अभिषेक झा ने झारखंड उच्च न्यायालय के 18 मई के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने झा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें चार सप्ताह के भीतर अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने को कहा था।
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि पीएमएलए के तहत अपराधों में सख्ती से धारा 45 लागू होगी। अपराध की व्यापकता (जिसमें करोड़ों रुपये की आपराधिक आय शामिल है) को ध्यान में रखते हुए, इसके सबूतों को देखते हुए यह मामला अग्रिम जमानत देने के लिए उपयुक्त नहीं लगता है।
अभियोजन पक्ष (ईडी) के मुताबिक, सिंघल से शादी के बाद झा की वित्तीय संपत्ति बढ़ी और कथित तौर पर भ्रष्ट गतिविधियों के जरिए अधिकारी द्वारा अर्जित अपराध की आय औप गलत तरीके से अर्जित नकदी उनके बैंक खातों में आने लगी। वहीं, झा ने दावा किया है कि यह धन ऑस्ट्रेलिया में उनकी नौकरी से हुई वैध आय है।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में इस बात पर गौर किया कि झा की जून 2011 में सिंघल से शादी हुई थी। हाई-प्रोफाइल आईएएस अधिकारी 16 फरवरी, 2009 से 19 जुलाई, 2010 तक खूंटी जिले के उपायुक्त के रूप में तैनात थे।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था, सार्वजनिक धन के बड़े पैमान पर गबन का पता चला है और खूंटी जिले में अभियोजन की शिकायत के पैरा 1.6 में बताया गया है कि 16 प्राथमिकियां दर्ज की गई थीं, उस समय पूजा सिंघल उपायुक्त थीं। 16 प्राथमिकियों के मुताबिक गबन की राशि 18.06 थी। सभी 16 प्राथमिकियों को राम बिनोद प्रसाद सिन्हा, आरके जैन और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किए गए थे।