याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस साल तीन अप्रैल को हुई प्रारंभिक परीक्षा में राज्य की मूल निवासी महिलाओं के लिए निर्धारित कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल करने के बावजूद उन्हें राज्य सेवा की मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की सिविल सेवाओं में राज्य की मूल निवासी महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने के 2006 के आदेश पर उत्तराखंड हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को शुक्रवार को हटा लिया। न्यायमूर्ति एस ए नज़ीर और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने इस मामले में नोटिस जारी किया और उत्तराखंड सरकार की याचिका पर जवाब मांगा। उत्तराखंड सरकार ने हाई कोर्ट के 24 अगस्त, 2022 के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था। इसने राज्य के बाहर से एक दर्जन से अधिक महिला उम्मीदवारों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश पारित किया था जो अनारक्षित श्रेणी में थीं।
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याचिका में कहा गया है कि इस साल तीन अप्रैल को हुई प्रारंभिक परीक्षा में राज्य की मूल निवासी महिलाओं के लिए निर्धारित कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल करने के बावजूद उन्हें राज्य सेवा की मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई। याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड सरकार के पास अधिवास-आधारित आरक्षण प्रदान करने की शक्ति नहीं है और संविधान केवल संसद द्वारा अधिनियमित कानून द्वारा अधिवास (domicile) के आधार पर आरक्षण की अनुमति देता है।