फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट: शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोपी को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत, जयपुर का मामला

Wed, 08 Dec 2021 10:10 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने इस मामले में जारी नोटिस का तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। छह दिसंबर को जारी आदेश में कोर्ट ने याचिकाकर्ता आरोपी को कहा है कि वह जांच का सामना और सहयोग करे।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने शादी का झांसा देकर एक महिला से दुष्कर्म के आरोपी को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी। कोर्ट ने आरोपी की अपील पर राजस्थान सरकार व अन्य को नोटिस जारी किया है। 

विज्ञापन


जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने इस मामले में जारी नोटिस का तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। छह दिसंबर को जारी आदेश में कोर्ट ने याचिकाकर्ता आरोपी को कहा है कि वह जांच का सामना और सहयोग करे। शीर्ष कोर्ट ने पुलिस को भी यह छूट दी है कि वह इस अंतरिम आदेश को खारिज कराने के लिए अर्जी दायर कर सकती है। 

याचिकाकर्ता की ओर से पेश होकर वकील नमित सक्सेना ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ दुष्कर्म के आरोप आधारहीन हैं। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ झूठे आरोप लगाए हैं, क्योंकि उसने महिला से शादी करने से इनकार कर दिया। शीर्ष कोर्ट में आरोपी मुकेश कुमार सिंह ने अपील दायर की है। वह जयपुर में टेक्नीशियन ग्रेड 1 के पद पर कार्यरत है। उसने राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा उसकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करने को चुनौती दी है। 
विज्ञापन


अपील के अनुसार सिंह की करीब 10 साल पहले इस महिला से मुलाकात हुई थी। तब वे काम के सिलसिले में एक दूसरे के संपर्क में आए थे। इसी दौरान सिंह व शिकायतकर्ता महिला मैसेजों व कॉल के जरिए एक दूसरे के संपर्क में रहे। इसके बाद वे नियमित रूप से मिलते रहे। 

6 अगस्त 2021 को सिंह की शादी उनके परिजनों ने तय कर दी। जब शिकायतकर्ता महिला को यह पता चला तो उसने कथित तौर पर सिंह को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उसने  सिंह से उससे शादी करने का दबाव डाला और धमकी दी कि ऐसा नहीं किया तो वह उसके खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज करा देगी। बाद में महिला ने सिंह के खिलाफ जयपुर में एफआईआर दर्ज करा दी। 

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह एफआईआर सतही आधार पर दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील में कहा गया है कि एफआईआर में रोमांटिक संबंध के उक्त तथ्य को स्वीकार किया गया है, लेकिन केस याचिकाकर्ता को परेशान करने के इरादे से ही दायर किया गया है, क्योंकि उसने शिकायतकर्ता से शादी नहीं करने का फैसला किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें