सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र को उस जनहित याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया, जिसमें राज्य स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। इसमें कहा गया है कि 10 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और अल्पसंख्यकों के लिए योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा और समय मांगने के बाद केंद्र से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने इसी तरह के मुद्दे पर विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की।
शीर्ष अदालत ने पांच समुदायों मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी को अल्पसंख्यक घोषित करने की केंद्र की अधिसूचना के खिलाफ कई हाई कोर्ट से मामले स्थानांतरित करने की मांग करने वाली याचिका को भी अनुमति दी और मामले को मुख्य याचिका के साथ सूचीबद्ध किया। याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने पीठ से सुनवाई की निश्चित तारीख की मांग की लेकिन शीर्ष अदालत ने मामले को सात सप्ताह के बाद सूचीबद्ध किया।
पीठ ने कहा, पर्यावरण को देखें। इसे स्थिर होने दें। अगले हफ्ते हम केवल जरूरी मामलों को ही ले रहे हैं। हम नहीं जानते कि अगले दो-तीन हफ्तों में चीजें कैसे होंगी। चीजों को स्थिर होने दें। उपाध्याय ने अपनी याचिका में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान अधिनियम 2004 की धारा 2 (एफ) की वैधता को भी चुनौती दी है जो केंद्र को असीमित शक्ति देता है।