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Supreme Court: 'गंगा नदी के आस-पास न हो कोई अवैध निर्माण कार्य', सुप्रीम कोर्ट का बिहार सरकार को निर्देश

Sat, 02 Dec 2023 03:37 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Supreme Court: सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य (बिहार सरकार) इस अदालत को एक हलफनामा दायर करके इन अवैध ढांचों को हटाने की दिशा में हुई प्रगति के बारे में रिपोर्ट देगा। इस तरह का हलफनामा बिहार के मुख्य सचिव द्वारा दायर किया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने बिहार सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि गंगा नदी के करीब, खासकर पटना और उसके आस-पास कोई निर्माण कार्य न हो। 

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न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राज्य सरकार को पटना में गंगा नदी के डूब क्षेत्र में बनाए गए उन अवैध ढांचों को हटाने के बारे में सूचित करते हुए हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया, जिन्हें चिह्नित किया गया है। 

मामला जब सुनवाई के लिए आता है तो बिहार सरकार के वकील कहते हैं कि राज्य ने पटना और उसके आसपास गंगा नदी से सटे 213 अनधिकृत निर्माणों की पहचान की है और इन अतिक्रमणों को हटाने के लिए कदम उठाए गए हैं।

पीठ ने कहा, 'राज्य इस अदालत को एक हलफनामा दायर करके इन अवैध ढांचों को हटाने की दिशा में हुई प्रगति के बारे में रिपोर्ट देगा। इस तरह का हलफनामा बिहार के मुख्य सचिव द्वारा दायर किया जाएगा। राज्य यह भी सुनिश्चित करेगा कि गंगा नदी के आसपास, विशेष रूप से पटना शहर में और उसके आसपास कोई और निर्माण न हो।'

शीर्ष अदालत पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इससे पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 30 जून, 2020 के आदेश में उनकी याचिका खारिज कर दी थी। सिन्हा ने पर्यावरण की दृष्टि से नाजुक बाढ़ क्षेत्र पर अवैध निर्माण और स्थायी अतिक्रमण के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। 

याचिका में दलील दी गई थी कि एनजीटी ने पटना में गंगा के डूब क्षेत्र में अतिक्रमण करने वाले उल्लंघनकर्ताओं के विस्तृत विवरण की जांच किए बिना आदेश पारित किया। अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ के जरिए दायर याचिका में कहा गया था,'गंगा के डूब क्षेत्र में अवैध और अनधिकृत निर्माण और स्थायी अतिक्रमण से भारी मात्रा में कचरा, शोर और सीवेज पैदा हो रहा है।'
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इसमें कहा था कि अवैध निर्माण आसपास रहने वाले निवासियों के जीवन और संपत्ति के जोखिम को बढ़ा रहे हैं। हर साल क्षेत्र बाढ़ के पानी में डूब जाता है। अवैध निर्माण नदी के प्राकृतिक मार्ग को बाधित कर रहे हैं।
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