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Supreme Court: 'एलजी-सीएम क्यों नहीं तय करते मुख्य सचिव के नाम', CS की नियुक्ति विवाद पर कोर्ट ने कही यह बात

Fri, 24 Nov 2023 06:01 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर दिल्ली और केंद्र के बीच रार थमने का नाम नहीं ले रही है। सुप्रीम कोर्ट में मामले को लेकर सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दिल्ली के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री इसको लेकर चर्चा क्यों नहीं कर सकतें। पढ़ें पूरा मामला...
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली में नए मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र आमने-सामने हैं। इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री मुख्य सचिव की नियुक्ति के लिए नामों पर चर्चा करने के लिए क्यों नहीं मिल सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, पिछली बार हमने डीईआरसी अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए कहा था लेकिन तब भी वे सहमत नहीं हुए।

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पीठ ने प्रस्ताव दिया, एलजी और केंद्र नामों का एक पैनल क्यों नहीं प्रस्तावित करते? अंतिम विकल्प आपके द्वारा बनाए गए पैनल में से होगा। आप एक पैनल का सुझाव दें। फिर वे (दिल्ली सरकार) एक नाम चुनेंगे। 

शुक्रवार को सुनवाई की शुरुआत में दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा कि सेवाओं से संबंधित कानून शीर्ष अदालत में विचाराधीन है और एलजी की ओर से शक्ति का एकतरफा प्रयोग नहीं किया जा सकता। सीजेआई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आप सरकार ने बिना किसी परामर्श के नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के केंद्र के किसी भी कदम के खिलाफ याचिका दायर की है। साथ ही 30 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे मुख्य सचिव नरेश कुमार का कार्यकाल बढ़ाए जाने को भी चुनौती दी है।
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मुख्य सचिव की नियुक्ति हमेशा गृह मंत्रालय करता है
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुख्य सचिव की नियुक्ति हमेशा से केंद्रीय गृह मंत्रालय करता है। सिंघवी ने कहा, मुख्य सचिव की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सिफारिश पर होती है। इस पर मेहता ने कहा, कभी नहीं, मैं इसे हलफनामे में भी लिखित दे सकता हूं। इस पर सीजेआई ने कहा, हमारे पास एक ऐसा तरीका होना चाहिए जिसके तहत सरकार काम करे। मुझे यकीन है कि आप दोनों हमें कोई रास्ता दे सकते हैं।

दिल्ली सरकार ने याचिका में लगाए ये आरोप
याचिका में आरोप है कि संशोधन अधिनियम 2023 संविधान पीठ के फैसले का उल्लंघन है। आप ने दलील दी, यह दिल्ली सरकार को मुख्य सचिव की नियुक्ति में केवल पर्यवेक्षक बनाता है। प्रभावी और सुचारु शासन के लिए, यह राज्य सरकार है, जो मुख्य सचिव की नियुक्ति करती है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर) नियम, 1954 के नियम 7(2) में साफ है, राज्य कैडर में नियुक्तियां राज्य सरकार करती है। इस व्यवस्था के पीछे के तर्क को इस अदालत ने बार-बार बरकरार रखा है।

अपमानजनक आरोपों के कारण करना पड़ा शीर्ष अदालत का रुख : एलजी कार्यालय
एलजी कार्यालय की ओर से वकील हरीश साल्वे ने कहा, मुझे यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि मुख्य सचिव के खिलाफ टिप्पणियां चल रही हैं और उन्हें अपमानजनक आरोपों के खिलाफ अदालत का रुख करना पड़ा। पीठ ने इस मामले में सुनवाई 28 नवंबर को तय की है।

बता दें सुप्रीम कोर्ट केंद्र द्वारा बिना किसी परमार्श के नए मुख्य सचिव की नियुक्ति या कार्यकाल बढ़ाने के खिलाफ दिल्ली सरकार की याचिका पर सु नवाई कर रही है। बता दें वर्तमान मुख्य सचिव नरेश कुमार 30 नवंबर को अपने पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। दिल्ली सरकार ने सवाल उठाया है कि केंद्र बिना किसी परामर्श के मुख्य सचिव की नियुक्ति कैसे आगे बढ़ा सकता है।

अगस्त माह में अधिसूचित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम, केंद्र को राष्ट्रीय राजधानी में नौकरशाही पर नियंत्रण देता है और समूह-ए अधिकारियों के स्थानांतरण और पोस्टिंग के लिए इसके तहत एक प्राधिकरण बनाया गया था। इसके खिलाफ दिल्ली सरकार ने याचिका दायर की। आरोप लगाया गया कि 2023 संशोधन अधिनियम 2023 की संविधान पीठ के फैसले का उल्लंघन है।

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