उत्तराखंड में वनाग्नि मामले पर 8 मई को सुनवाई
उत्तराखंड के जंगलों में भीषण आग की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 8 मई को सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत ने कहा है कि उत्तराखंड के जंगलों में नवंबर से लेकर अब तक वनाग्नि के 910 मामले सामने आए हैं। इस आग की वजह से 1145 हेक्टेयर वन भूमि जलकर राख हो गई है। न्यायमूर्ति बी आर गवई और संदीप मेहता की पीठ इस मामले पर सुनवाई करेगी। कोर्ट में पेश हुए एक वकील ने इस मामले में एक प्रार्थना पत्र देते हुए कहा है कि उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में अब तक कुल 44 प्रतिशत जंगल जल चुके हैं। उन्होंने कहा कि वनाग्नि के 90 प्रतिशत मामलों में इंसानों का हाथ है।
मानिकतला में चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर 9 मई को सुनवाई
भाजपा नेता और ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष कल्याण चौबे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में मानिकतला विधानसभा में हुए चुनाव को चुनौती दी थी। बता दें कि तृणमूल कांग्रेस के नेता साधन पांडे ने मानिकतला सीट से जीत हासिल करते हुए चौबे को हराया था। इसके बाद कल्याण चौबे ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव नतीजों को चुनौती दी थी। उन्होंने साधन पांडे पर चुनाव में हिंसा का आरोप लगाया था। 20 फरवरी 2022 को साधन पांडे के निधन के बाद सीट खाली हो गई थी लेकिन चुनाव आयोग ने इस सीट पर उप-चुनाव कराने से इनकार दिया था। आयोग ने इसकी वजह यह बताई थी कि कल्याण चौबे की की याचिका अभी हाईकोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 9 मई को होगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर अगली सुनवाई में कल्याण चौबे नहीं आए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार और गुजरात में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए होने वाली मौखिक परीक्षा के लिए न्यूनतम योग्यता अंक निर्धारित करने वाले नियमों को बरकरार रखा है। इसके अलावा गुजरात और बिहार में होने वाली भर्तियों के लिए एक न्यायिक अधिकारी की नियक्ति का भी निर्देश दिया है। न्यायिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की चिंताओं और जिला न्यायपालिका में न्यायाधीशों की धीमी चयन प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए अदालत ने ये निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया के उम्मीदवारों के मुद्दों से निपटने के लिए एक नामित प्राधिकारी को सूचित किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और प्रशांत कुमार की पाठ ने बिहार और गुजरात की जिला न्यायिक परीक्षाओं में असफल रहे कई अभ्यर्थियों की याचिका पर यह फैसला सुनाया।
शीर्ष अदालत में एसआईआई की याचिका 17 मई तक स्थगित
सुप्रीम कोर्ट ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को 17 मई तक के लिए स्थगित कर दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने आयकर अधिनियम में 2016 के संशोधन के खिलाफ एसआईआई की याचिका खारिज कर दी थी। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद पी दातार द्वारा बहस के लिए समय मांगने के बाद मामले को स्थगित कर दिया। कंपनी ने शीर्ष अदालत में बॉम्बे हाईकोर्ट के 4 दिसंबर, 2023 के आदेश को चुनौती दी थी। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने वित्त अधिनियम, 2015 के तहत कुछ धाराओं में संशोधन के खिलाफ कंपनी की याचिका खारिज कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में डीडीए के खिलाफ कार्रवाई की मांग
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। समिति ने बताया कि डीडीए ने शीर्ष अदालत के निर्देशों का उल्लंघन किया है। सीईसी ने बताया कि डीडीए ने केंद्र की मंजूरी के बिना दक्षिण दिल्ली में लगभग 750 पेड़ों को काटा और वहां अवैध निर्माण कराया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि एक न्यायिक अधिकारी के रूप में किसी व्यक्ति को सिर्फ लिखित परीक्षा के आधार पर नहीं चुना जाना चाहिए। इसमें उसके बोलने की क्षमता पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि बोलने की क्षमता किसी न्यायालय में पीठासीन अधिकारी की भूमिका में उनकी उपयुक्तता को प्रदर्शित करेगा। जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र की पीठ ने न्यायिक अधिकारियों के पद पर साक्षात्कार के लिए बिहार में 20 फीसदी और गुजरात में 40 फीसदी की न्यूनतम कट ऑफ अंक के साथ शुरू की गई चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली कई रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि कट ऑफ को उच्च नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह साक्षात्कार न्यायिक अधिकारियों के चयन के लिए है।
साक्षात्कार के लिए न्यूनतम योग्यता अंक निर्धारित करना स्वीकार्य
पीठ ने कहा कि जिला अदालतों में न्यायिक अधिकारियों के पद के लिए साक्षात्कार के लिए न्यूनतम योग्यता अंक निर्धारित करना स्वीकार्य है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह ऑल इंडिया जजेस (2002) मामले में उसके पिछले फैसले का उल्लंघन नहीं है, जिसमें न्यायमूर्ति केजे शेट्टी आयोग की कुछ सिफारिशों को स्वीकार किया गया था। हालांकि अदालत ने कहा कि पारदर्शिता, निश्चितता और स्पष्टता सुनिश्चित करने और चयन प्रक्रिया में दुविधाओं से बचने के लिए मॉडरेशन जैसी प्रक्रियाओं को अपनाया जाना चाहिए।