सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया वह आवश्यक प्रशासकीय कदम उठाए, ताकि किसी भी मामले में अपील दायर करने में विलंब न हो। शीर्ष कोर्ट ने यह भी कहा कि इन पर समुचित निगरानी के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी प्रणाली बनाई जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जून 2019 के एक आदेश के खिलाफ जांच एजेंसी द्वारा 647 दिनों बाद अपील दायर करने का जिक्र करते हुए कहा कि सीबीआई द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण 'साफतौर पर अपर्याप्त' है। इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपी को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली सीबीआई की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने अपील दायर करने में देरी के कारण याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड व जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने पिछले सप्ताह जारी अपने आदेश में कहा कि सीबीआई को निर्देश दिया जाता है कि वह अपील दायर करने में भविष्य में ऐसी देरी ना हो, इसलिए सभी आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए। तय समय सीमा में अपील दायर नहीं करने वाले संबंधित अधिकारियों ने देरी का कारण बताने में गंभीर चूक के जिम्मेदार हैं। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि कोविड महामारी के कारण देरी होने का कारण समूचे विलंबकाल का ब्योरा पेश नहीं करता है। हाईकोर्ट ने जून 2019 में फैसला सुनाया था, जबकि महामारी मार्च 2020 में शुरू हुई थी।
पीठ ने कहा कि विशेष अनुमति याचिका दायर करते वक्त विलंब को लेकर सफाई देते वक्त कोर्ट के प्रति पूरा सम्मान बरता जाना चाहिए। इसलिए हम सीबीआई को निर्देश देते हैं कि वह अपील दायर करने के आवश्यक प्रशासकीय और अन्य कानूनी जरूरतों को लेकर कदम उठाए। सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाए, ताकि इस तरह की देरी ना हो।
शीर्ष कोर्ट ने यह निर्देश भ्रष्टाचार के एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा एक आरोपी को दोषमुक्त करार देने के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। रायपुर की निचली कोर्ट ने नवंबर 2012 में आरोपी को सजा सुनाई थी। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के अलावा धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश की धाराएं भी लगाई गई थीं। वह सजा के खिलाफ हाईकोर्ट गया था। हाईकोर्ट ने जून 2019 में उसे दोषमुक्त करार दिया था।