पूरा देश इस समय भीषण गर्मी का सामना कर रहा है। जहां हर साल देश में मई माह से मानसून की आमद हो जाती थी वहीं इस साल अभी इसके आसार भी नहीं दिखते। हालांकि भारतीय़ मौसम विभाग ने संभावना जताई है कि अगले माह यानी जून के पहले सप्ताह में मानसून केरल में दस्तक दे देगा। वहीं, दक्षिण एशियाई जलवायु आउटलुक फोरम (एसएएससीओएफ) ने भारत में मानसून को लेकर एक संभावना जताई है। एसएएससीओएफ ने कहा है कि भारत की लगभग 19 प्रतिशत आबादी को इस वर्ष मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश और लगभग 13 प्रतिशत आबादी को सामान्य से अधिक बारिश का सामना करना पड़ सकता है।
एसएएससीओएफ ने मानसून को लेकर जताई यह संभावना
‘साउथ एशियन सीजनल क्लाइमेट आउटलुक फोरम’ (एसएएससीओएफ) ने अनुसार मानसून के दौरान भारत की लगभग 18.6 प्रतिशत आबादी को सामान्य से कम बारिश का सामना करना पड़ सकता है। बीते सालों के डेटा का विश्लेषण करके और वर्तमान जलवायु स्थितियों की निगरानी लके बाद एसएएससीओएफ ने यह संभावना व्यक्त की है।
उत्तर भारत में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना
‘साउथ एशियन सीजनल क्लाइमेट आउटलुक फोरम’ (एसएएससीओएफ) ने अपने विश्लेषण के आधार पर संभावना जताई है कि उत्तर भारत में सामान्य से कम बारिश होने की 52 प्रतिशत संभावना है। वहीं, देश के मध्य भागों में सामान्य से कम वर्षा की 40 प्रतिशत संभावना है।
एसएएससीओएफ ने यह भी कहा है कि भारत में कुल 12.7 प्रतिशत लोगों को सामान्य से अधिक बारिश का सामना करना पड़ सकता है।
दक्षिणी और पूर्वी भागों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना
एसएएससीओएफ ने भारत के दक्षिणी और पूर्वी भागों में मानसून के दौरान की वर्षा को लेकर भी संभावना जताई है। एसएएससीओएफ ने कहा है कि देश के इन भागों में सामान्य से अधिक बारिश होने का 50 प्रतिशत अनुमान है।
अल-नीनो के कारण कम वर्षा की संभावना
मौसम विभाग का कहना है कि इस साल बारिश सामान्य होगी। हालांकि, जून से सितंबर के दौरान ही अल-नीनो विकसित होने जा रहा है। इसकी वजह से मानसून सामान्य से कम रह सकता है। प्रशांत महासागर में अल नीनो पैटर्न विकसित होने की संभावना 90 फीसदी है। पहले भी भारत में अल नीनो औसत से कम बारिश करवा चुका है। जिन वर्षों में यह पैटर्न बनता है, उनमें सूखे व औसत से कम बारिश की आशंका बढ़ती है। यह फसलों को तबाह करता है, भारत को कई बार खाद्यान्नों का निर्यात भी रोकना पड़ा है। इसका असर भारत तक सीमित न रहकर पूरे विश्व पर पड़ता है।