टीएमसी नेता कुणाल घोष(फाइल फोटो)
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सारदा चिटफंड घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष को नोटिस भेजा है। इसके तहत कुणाल को कल यानि मंगलवार को दस्तावेज के साथ पूछताछ के लिए ईडी के दफ्तर आने को कहा गया है। वहीं कुणाल घोष ने इस मामले पर कहा कि मैं कल निश्चित रूप से अधिकारियों के सामने पेश हूंगा और जांच में हर तरह की सहायता करूंगा।
क्या है सारदा चिटफंड घोटाला
सारदा चिटफंड घोटाले की शुरुआत वर्ष 2000 में शुरू हुई। उद्योगपति सुदीप्तो सेन ने इस ग्रुप की स्थापना की। सुदीप्तो ने इस ग्रुप के तहत 4-5 प्रमुख कंपनियों के अलावा 239 कंपनियां बनाईं। इन कंपनियों ने तीन तरह की स्कीमें चलाईं जिसके तहत ये फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट स्कीम थी। इन स्कीमों के जरिए जमाकर्ताओं को बताया गया कि उनको निवेश के बदले 25 गुना ज्यादा रिटर्न मिलेगा और इस लोभ में भोली भाली जनता आ गई फिर सभी ने निवेश शुरू कर दिया। लेकिन जब जनता ने अपने पैसे मांगे तो कंपनी देने से मुकर गई।
राज्य सरकार ने पुराने मामले को खोलने पर उठाया सवाल
वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्य में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले शारदा चिट फंड घोटाला मामले में आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार के खिलाफ अवमानना याचिका को फिर से खोलने को लेकर सवाल उठाया है।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जस्टिस एस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि सीबीआई राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पुराने मामले को खोल रही है।
इस पर सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अवमानना मामला हमेशा जीवित रहता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई दो हफ्ते के लिए टाल दी। सीबीआई ने राजीव कुमार को कस्टडी में लेकर पूछताछ करने के लिए उनकी जमानत रद्द करने की गुहार लगाई है। सीबीआई का कहना है कि पूछताछ के दौरान आईपीएस अधिकारी भागते फिर रहे थे।