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Sandeshkhali: 'संदेशखाली में मानवाधिकारों का उल्लंघन, लोगों को डरा-धमका कर रखा गया', NHRC ने रिपोर्ट में दावा

Sat, 13 Apr 2024 05:17 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संदेशखाली में हिंसा मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट सामने आई। बताया गया है कि संदेशखाली में मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ और स्थानीय लोगों को डरा-धमकाकर रखा गया। 

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में हुई हिंसा के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि संदेशखाली में लापरवाही की वजह से मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ। रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित ग्रामीणों को हमले, धमकी, यौन शोषण का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों को डरा-धमकाकर रखा गया और इस वजह से उन्हें राज्य छोड़कर बाहर जाने पर मजबूर होना पड़ा। एनएचआरसी द्वारा यह रिपोर्ट पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजा गया है।

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एनएचआरसी ने रिपोर्ट में बताई ये बातें
एनएचआरसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि डर की वजह से संदेशखाली के पीड़ित लोग अपनी शिकायत व्यक्त नहीं कर पाए। आयोग द्वारा एक बयान में कहा कि पैनल द्वारा कई सिफारिशें की गई हैं और पश्चिम बंगाल सरकार से आठ सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि संदेशखाली में अत्याचार के कई मामले सामने आए हैं, इससे पता चलता है कि सरकार द्वारा लापरवाही की वजह से मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ।

‘लगातार अत्याचारों के डर से चुप रहे पीड़ित’
एनएचआरसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार हुए अत्याचारों की वजह से पीड़ित डरे हुए थे। इसलिए वे कुछ कह नहीं पाए और ना ही न्याय मांग पाए। आगे बताया गया है कि पीड़ितों को भय के माहौल से बाहर निकालने के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने की तत्काल जरूरत है। 
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एनएचआरसी ने की ये सिफारिशें
21 फरवरी को, एनएचआरसी ने संदेशखाली को लेकर तमाम मीडिया रिपोर्ट्स पर स्वत: संज्ञान लिया था। इसके बाद आयोग द्वारा इस मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आयोग द्वारा मौके पर जांच के लिए एक टीम को तैनात किया गया था। टीम ने संदेशखाली में पुलिस और प्रशासन से भी बातचीत की। एनएचआरसी द्वारा यौन अपराधों के पीड़ितों को परामर्श देना, जमीन के असली हकदारों को भूमि की वापसी और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष जांच की सिफारिशें की गई हैं। इसके अलावा स्थानीय लोगों को रोजगार देने, संदेशखाली की स्थिति पर समय-समय पर रिपोर्ट देने के लिए विशेष दूत नियुक्त करने और लापता महिलाओं के मामलों की जांच करने की भी सिफारिश की गई है।

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