फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sandeshkhali: तथ्य ढूंढने वाली टीम को संदेशखाली जाने से रोका, बाद में छह लोगों को जाने की दी अनुमति

Sun, 03 Mar 2024 02:55 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

कोलकाता से लगभग 100 किलोमीटर दूर, सुंदरबन की सीमाओं पर स्थित संदेशखाली इलाका एक महीने से अधिक समय से शाहजहां और उनके समर्थकों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के साथ उबाल पर है।
विज्ञापन
हरियाणा पुलिस के पूर्व आईजी राजपाल सिंह - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में स्थित संदेशखाली गांव इन दिनों चर्चा में है। गांव की महिलाओं ने आरोप लगाया है कि टीएमसी नेता शाहजहां शेख ने उनकी जमीन पर कब्जा करने के साथ-साथ कुछ महिलाओं के साथ यौन शोषण भी किया है। बंगाल की पूरी सियासत अभी संदेशखाली के ईर्दगिर्द भटक रही है। एक के बाद एक जांच टीम गांव का दौरा कर रही है। अब रविवार को कोलकाता हवाईअड्डे से संदेशखाली के लिए तथ्य ढूंढने वाली एक टीम रवाना हुई है। 

विज्ञापन


पुलिस ने धामाखली में तथ्य ढूंढने वाली टीम को रोक लिया और उन्हें संदेशखाली जाने से मना कर दिया। बाद में छह लोगों को जाने की अनुमति दे दी।
   

इससे पहले, हरियाणा पुलिस के पूर्व आईजी राजपाल सिंह ने बताया, ' हम उन तीन जगहों पर जा रहे हैं, जिनका उच्च न्यायालय के आदेश में जिक्र किया गया है।'
विज्ञापन

 
पीड़ितों से मिलने के बाद टीम ने बताई सच्चाई
संदेशखाली में पीड़ितों से मिलने के बाद तथ्य ढूंढने वाली टीम के एक सदस्य ने कहा, एक मामले में 11 लोगों को और दूसरे मामले में 74 लोगों को पोल्ट्री फार्म जलाए जाने के मामले में फंसाया गया क्योंकि शुरुआती समय में या तो उन्होंने या उनकी पत्नियों ने आवाज उठाई थी। इन लोगों को परेशान करने के लिए सभी पर एफआईआर की गई थी। हालांकि इब सभी को रिहा कर दिया गया है। यह बेहद डरावना है।'
 
उन्होंने आगे कहा, 'देश में ऐसा माहौल कभी नहीं रहा। एक व्यक्ति पूरे द्वीप की कमान संभाल रहा है और लोगों को धमका रहा है। परिवार बिखर गए हैं। पतियों को सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है और महिलाओं को आधी रात के बाद पुलिस स्टेशन ले जाया जा रहा है। जमीन छीन ली गई है। अगर कोई दुकानदार 20-25 हजार महीने का भुगतान नहीं करता है तो उसकी दुकान जब्त कर ली जाती है। एक मामले में उस पैसे का इस्तेमाल करके छीनी गई जमीन पर स्ट्रक्चर बनाकर बेच दिया जाता है। यह एक आंख खोलने वाला मामला है। हमें वास्तव में यहां की महिलाओं को बधाई देनी चाहिए, जिन्होंने खड़े होकर विद्रोह किया है।'

ज्यादातर महिलाओं के शरीर पर चोट के निशान- भावना बजाज
संदेशखाली के पीड़ितों से मुलाकात पर फैक्ट फइंडिंग कमेटी की सदस्य भावना बजाज ने कहा कि मैं 28-70 साल की उम्र की 20 महिलाओं से मिली। 70 साल की महिलाएं खड़े होकर रो रही थीं। मैं पीड़िता की पहचान की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए बिना किसी कैमरापर्सन के अकेले एक पीड़िता से मिलने गई। उसके पूरे चेहरे पर चोट के निशान थे। उसके पति को गांव छोड़ने के लिए मजबूर किया गया है। अधिकतम महिलाओं ने शिबू हाजरा नामक एक व्यक्ति का नाम लिया है। महिलाओं का कहना है कि वे अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास नहीं जा सकतीं क्योंकि कोई उनकी बात नहीं सुनता है।

भाजपा शासित राज्यों में क्यों नहीं फैक्ट फाइंडिंग कमेटी- पांजा
इस बीच, संदेशखाली मामले पर फैक्ट फइंडिंग कमेटी पर पश्चिम बंगाल के मंत्री शशि पांजा ने कहा कि मैं सिर्फ यह कहना चाहती हूं कि हम सीएम ममता बनर्जी द्वारा उठाए गए कदमों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। जब आरोप साबित नहीं हुए थे तब भी कदम उठाए गए क्योंकि लोग परेशानी में थे। उन्हें निश्चित रूप से तथ्य को खोजने के लिए जाना चाहिए लेकिन कोई अन्य तथ्य स्थापित नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में कोई फैक्ट फाइंडिंग कमेटी मिशन क्यों नहीं है। 

क्या है संदेशखाली विवाद
कोलकाता से लगभग 100 किलोमीटर दूर, सुंदरबन की सीमाओं पर स्थित संदेशखाली इलाका एक महीने से अधिक समय से शाहजहां और उनके समर्थकों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के साथ उबाल पर है। दरअसल गांव की महिलाओं ने बीते दिनों आरोप लगाए थे कि टीएमसी नेता शाहजहां शेख और अन्य टीएमसी नेताओं ने उनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया और कुछ महिलाओं ने टीएमसी नेताओं पर यौन शोषण के भी आरोप लगाए थे। इसे लेकर संदेशखाली में महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा कार्यकर्ता भी संदेशखाली में प्रदर्शन कर रहे हैं। शाहजहां शेख राशन घोटाले में आरोपी है और बीते दिनों ईडी टीम पर हुए हमले में भी शाहजहां शेख आरोपी है। वहीं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भाजपा पर इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें