Amar Ujala Samvad 2025: एक बार फिर अमर उजाला के प्रतिष्ठित कार्यक्रम 'संवाद' का आयोजन होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोलजित इस कार्यक्रम की शुरुआत गुरुवार को लखनऊ के गोमती नगर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगी। जिसमें प्रदेश के विकास समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। देश की जानी-मानी शख्सियतें, नीति-नियंता, विचारक-विशेषज्ञ श्रोताओं से रू-ब-रू होंगे।
17 अप्रैल से लखनऊ में अमर उजाला संवाद का मंच सजने जा रहा है। गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में इस दो दिवसीय कार्यक्रम में राजनीतिक मुद्दों से लेकर फिल्मों, खेलकूद, राष्ट्रीय सुरक्षा, समाजसेवा, कला-संस्कृति समेत कई विषयों पर परिचर्चाएं होंगी। इस दौरान देश-प्रदेश के विकास सहित अन्य मुद्दों पर बातचीत की जाएगी। पहले दिन कीर्ति चक्र से सम्मानित बीएसएफ के सेवानिवृत्त डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे शौर्य और पराक्रम की कहानियां साझा करेंगे।
नरेंद्रनाथ धर दुबे पर हाल ही में एक फिल्म भी रिलीज होने वाली है। फिल्म का नाम है- 'ग्राउंड जीरो'। इसमें इमरान हाशमी एक बीएसएफ कमांडेंट की भूमिका में नजर आने वाले हैं। दरअसल, 2003 में बीएसएफ की ओर से की गई कार्रवाई में जम्मू-कश्मीर में आतंकी गाजी बाबा मारा गया था। इस ऑपरेशन ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को बिना जनरल वाली सेना बनाकर रख दिया था। इस ऑपरेशन ने अर्धसैनिक बल को दो सैन्य अलंकरणों सहित एक दर्जन वीरता पदक भी दिलाए थे। तत्कालीन बीएसएफ 2-आईसी (सेकंड-इन-कमांड) रैंक के अधिकारी नरेंद्रनाथ धर दुबे ने इस ऑपरेशन का नेतृत्व किया था। राणा ताहिर नदीम उर्फ गाजी बाबा उस दिन से बीएसएफ के निशाने पर था, जिस दिन जैश-ए-मोहम्मद ने दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमला किया था।
30 अगस्त 2003 को सुरक्षा बल को नूरबाग (श्रीनगर) के एक घर में जैश-ए-मोहम्मद के चीफ ऑपरेशनल कमांडर एक खूंखार आतंकवादी राणा ताहिर नदीम उर्फ गाजी बाबा की मौजूदगी के बारे में जानकारी मिली। खुफिया इनपुट के आधार पर सीमा सुरक्षा बल ने एक तलाशी और घेराबंदी अभियान शुरू किया।
नरेंद्रनाथ धर दुबे अन्य अधिकारियों और जवानों के साथ घर का दरवाजा तोड़कर इमारत में दाखिल हुए। सबसे पहले घर की पहली मंजिल और भूतल की तलाशी ली गई। घर की दूसरी मंजिल पर कोई नहीं मिला। हालांकि, नरेंद्रनाथ धर दुबे को वहां रखी दो अलमारियों को देखकर कुछ शक हुआ। अलमारियां कमरे में अजीबोगरीब तरीके से रखी गई थीं। उन्होंने जवानों को कवर लेने का निर्देश दिया और अलमारी पर लगे शीशे पर वार करने को कहा।
ऐसा करते ही आतंकियों की साजिश नाकाम हो गई और खुफिया दरवाजा सभी के सामने आ गया। इसके अंदर आतंकवादी छिपे हुए थे। ऐसा होते ही आतंकियों ने भारी गोलीबारी शुरू कर दी। उनकी ओर से ग्रेनेड भी फेंके गए। इस दौरान नरेंद्रनाथ धर दुबे और कॉन्स्टेबल बलबीर सिंह को कई गोलियां लगीं।
घायल होने के बाद भी दोनों जवाबी फायरिंग करते रहे। तभी एक आतंकी तेजी से नरेंद्रनाथ धर दुबे की तरफ आया और उन पर नजदीक से गोली चलाने की कोशिश की। वह ऐसा करने ही वाला था कि कॉन्स्टेबल बलबीर सिंह अपनी जान की परवाह किए बिना अधिकारी के सामने कूद पड़े। कॉन्स्टेबल बलबीर सिंह के पेट में गोली लगी और उन्होंने दम तोड़ दिया।
तुरंत ही नरेंद्रनाथ धर दुबे ने आतंकवादी पर धावा बोला और उसकी राइफल पकड़ ली। आतंकी ने अपनी पिस्तौल निकाली और दुबे पर गोली चला दी, जिससे उनके हाथ में चोट आई। इसके आतंकी वहां से भागने लगा। गंभीर रूप से घायल और अत्यधिक खून से लथपथ दुबे ने आतंकी का पीछा किया और उसे वहीं मार गिराया। बाद में मृत आतंकवादी की पहचान कुख्यात राणा ताहिर नदीम उर्फ गाजी बाबा के रूप में हुई।
शरीर पर आठ गोलियां लगने और हाथ टूट जाने के बावजूद दुबे ने अपने अधिकारियों और जवानों को शेष आतंकवादियों के साथ चल रही गोलीबारी को सफलतापूर्वक समाप्त करने के लिए मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देना जारी रखा। इसके बाद की कार्रवाई में एक अन्य आतंकवादी भी मारा गया। उनकी वीरता, पराक्रम और शौर्य के लिए नरेंद्रनाथ धर दुबे को 26 जनवरी 2004 को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।