भाजपा दक्षिण भारत में हिंदू संतों के जरिए एक बड़ा चमत्कार करने की उम्मीद में है। अखिल भारतीय हिंदू संत समाज के शीर्ष संत अलग-अलग राज्यों में विभिन्न राज्यों के मंदिरों-मठों और अन्य धार्मिक संगठनों के शीर्ष प्रतिनिधियों से बातचीत कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बार के लोकसभा चुनाव में लोगों को ऐसे राजनीतिक दल को वोट देने के लिए प्रेरित किया जाए, जो सनातन धर्म और राष्ट्र की एकता-अखंडता को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा हो। हिंदू संत हिंदू जनता से अपील कर रहे हैं कि वे उस राजनीतिक दल (भाजपा) को वोट करें, जिसके कारण भगवान राम अयोध्या में विराजमान (राम मंदिर निर्माण) होने में समर्थ हो सके हैं। यानी राम मंदिर निर्माण महोत्सव की मुहिम के सहारे भाजपा दक्षिण में बड़े चमत्कार की उम्मीद कर रही है और इसके लिए हिंदू संतों के जरिए दक्षिण भारत में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
आंध्र प्रदेश में हुई 200 संतों की बैठक
अमर उजाला को मिली जानकारी के अनुसार, अखिल भारतीय हिंदू संत समाज से जुड़े लगभग 200 संतों ने अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में आंध्र प्रदेश में एक बैठक कर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के जनसमुदाय में यह चेतना विकसित करने का वचन लिया है कि लोगों को सनातन धर्म को मजबूत करने वाले दल को वोट करने के लिए प्रेरित किया जाए। इसके पहले कर्नाटक में एक बैठक की गई थी, जिसमें केरल और तमिलनाडु के संत भी शामिल थे। उस बैठक में भी संतों से इसी प्रकार की जनचेतना विकसित करने के लिए कहा गया था।
यहां की सीटें प्रमुख क्यों
भाजपा उत्तर भारत में लगभग अधिकतम सफलता हासिल कर चुकी है। यहां किसी राज्य में अब और ज्यादा बढ़त की उम्मीद नहीं है। प्रमुख रूप से इन्हीं राज्यों के सहारे वह 2019 में 303 लोकसभा सीटों पर सफलता हासिल कर चुकी है। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए के लिए 400 और भाजपा के लिए 370 सीटों पर सफलता पाने के लिए उसे दक्षिण भारत में सफलता हासिल करनी होगी, जहां इस समय उसका बहुत ज्यादा विस्तार नहीं हो सका है। भाजपा नेता मानते हैं कि इन राज्यों में उसके विस्तार करने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। विभिन्न दलों को साथ लेकर और प्रधानमंत्री के आक्रामक चुनाव प्रचार अभियान के जरिए इसी लक्ष्य को पाने की कोशिश की जा रही है।
इस दृष्टि से दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु (39 लोकसभा सीटें), आंध्र प्रदेश (25 लोकसभा सीटें), तेलंगाना (17 लोकसभा सीटें), कर्नाटक (28 लोकसभा सीटें) और केरल की (20 लोकसभा सीटें) इस बार भाजपा के लिए बहुत ज्यादा महत्त्वपूर्ण हो गई हैं। इन 129 सीटों में भाजपा ने पिछले चुनाव में 29 (कर्नाटक की 25 और तेलंगाना की चार) सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन शेष 100 सीटों पर उसे कोई सफलता नहीं मिली थी। इन बंद दरवाजों को खोलकर ही एनडीए-भाजपा 400 पार का लक्ष्य हासिल करना चाहती है। इसके लिए वह हिंदू संतों का भी खूब उपयोग कर रही है।
दिल्ली-हरियाणा में भी प्रयास
दिल्ली की सात लोकसभा सीटों और हरियाणा की दस लोकसभा सीटों के लिए लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 25 मई को एक बार में मतदान होगा। इसके पहले इस वर्ष 12 मई को आदि शंकराचार्य की जयंती है। इस दिन दिल्ली में इन दोनों राज्यों के संतों, मंदिरों के पुजारियों और अन्य शीर्ष धार्मिक नेताओं की एक बैठक आयोजित होनी है। इस बैठक में इन राज्यों में हिंदू समाज के लोगों को सनातन धर्म को मजबूत करने वाले राजनीतिक दल के लिए लोगों को वोट करने के लिए जागृत करने की रणनीति बनाई जाएगी। दिल्ली में भाजपा की स्थिति काफी मजबूत है, लेकिन हरियाणा में कांग्रेस की ओर से उसे कड़ी चुनौती मिल सकती है। संतों का यह प्रयास उसे इस चुनौती से निपटने में कुछ मदद कर सकता है।