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Sahitya Akademi Award: संजीव और नीलम को साहित्य अकादमी पुरस्कार, जानें 24 भारतीय भाषाओं में विजेताओं के नाम

Thu, 21 Dec 2023 05:28 AM IST
गुलाम अहमद संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली

सार

हिंदी के लिए संजीव का उपन्यास 'मुझे पहचानो' तो अंग्रेजी के लिए नीलम सरन गौर का उपन्यास 'रेक्युम इन रागा जानकी' चयनित हुआ है। वहीं, पंजाबी के लिए स्वर्णजीत सवी का कविता संग्रह 'मन दी चिप' और उर्दू के लिए सादिका नवाब सहर का उपन्यास 'राजदेव की अमराई' पुरस्कृत किए गए हैं।
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साहित्य अकादमी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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साहित्य अकादमी ने बुधवार को साहित्य अकादमी पुरस्कार-2023 की घोषणा की। हिंदी के लिए संजीव का उपन्यास ’मुझे पहचानो’ तो अंग्रेजी के लिए नीलम सरन गौर का उपन्यास 'रेक्युम इन रागा जानकी' चयनित हुआ है। वहीं, पंजाबी के लिए स्वर्णजीत सवी का कविता संग्रह 'मन दी चिप' और उर्दू के लिए सादिका नवाब सहर का उपन्यास 'राजदेव की अमराई' पुरस्कृत किए गए हैं। यह पुरस्कार साहित्य अकादमी पुरस्कार-2022 से पिछले पांच वर्षों में पहली बार प्रकाशित पुस्तकों पर दिए गए हैं। इन्हें सभी संबंधित भाषाओं के त्रि-सदस्यीय निर्णायक मंडल ने चुना हैै।

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पुरस्कार की घोषणा करते हुए अकादमी के सचिव डॉ. के श्रीनिवास राव ने बताया कि यह पुरस्कार मान्यता प्राप्त सभी 24 भारतीय भाषाओं में दिया जाएगा। इसमें नौ कविता संग्रह, छह उपन्यास, पांच कहानी संग्रह, तीन निबंध और एक आलोचना की पुस्तक शामिल है। साथ ही, उन्होंने बताया कि यह पुरस्कार 12 मार्च, 2024 को साहित्य अकादमी के 70 वर्ष पूरे होने के मौके पर दिए जाएंगे।

कविता के लिए पुरस्कृत लेखक
विजय वर्मा (डोगरी), विनोद जोशी (गुजराती), मंशूर बनिहाली (कश्मीरी), सोरोख्खैबम गंभिनी (मणिपुरी), आशुतोष परिडा (ओड़िया), स्वर्णजीत सवी (पंजाबी), गजेसिंह राजपुरोहित (राजस्थानी), अरुण रंजन मिश्र (संस्कृत), विनोद आसुदानी (सिंधी)।
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उपन्यास के लिए पुरस्कृत लेखक
स्वपनमय चक्रबर्ती (बांग्ला), कृष्णात खोत (मराठी), राजशेखरन (देवीभारती)।

इसी क्रम में पुरस्कृत कहानी-संग्रह के लेखक
प्रणव ज्योति डेका (असमिया), नंदेश्वर दैमारि (बोडो), प्रकाश एस पर्येंकार (कोंकणी), तारासीन बासकी (तुरिया चंद बासकी) (संताली), टी पतंजलि शास्त्री (तेलुगु)।

निबंध के लिए पुरस्कृत लेखक
लक्ष्मीशा तोल्पडि (कन्नड़), बासुकीनाथ झा (मैथिली), युद्धवीर राणा (नेपाली)। आलोचना के लिए मलयालम लेखक ईवी रामकृष्णन पुरुस्कृत होंगे।

किताब लिखने से पहले 10 साल जानकी पर शोध किया...
नीलम सरन गौर ने कहा, मैं प्रयागराज की रहने वाली हूं और इसी शहर के बारे में लिखती हूं। जब 6 साल की थी, तब से लिखना शुरू किया। मेरी किताब की नायिका का नाम जानकी है। वह ग्रामोफोन के जमाने में भी बड़ी मशहूर गायिका थीं। इतिहास में कोलकाता की गौहर जान से उसकी टक्कर होती थी। जितनी उम्दा वह कलाकार थीं, उससे अधिक दर्द भरा जीवन था। मैंने पुस्तक लिखने से पहले 10 साल जानकी पर शोध किया। यह किताब जानकीबाई के जीवन और शास्त्रीय संगीत की कहानी है। इसमें उनकी गजलों को भी सम्मिलित किया गया है। यह एक उपन्यास के रूप में उभरकर आई है। यह मेरी 13वीं किताब है। मेरी पहली किताब 30 साल पहले प्रकाशित हुई थी। यह किताब पेंग्विन प्रकाशन ने प्रकाशित की थी।
 
60 उपन्यास और 400 से ज्यादा कहानियां लिख चुके हैं संजीव
'मुझे पहचानो' उपन्यास के लेखक संजीव ने कहा, मैं सुल्तानपुर का रहने वाला हूं। मैंने अब तक 60 उपन्यास और 400 से ज्यादा कहानियां लिखी हैं। मैंने हर एक क्षेत्र का गहनता से अध्ययन किया है। इस किताब में मैंने स्त्रियों के प्रति जो सामाजिक नजरिया है, उसे रेखांकित किया है। साथ ही, सती प्रथा की कुरीतियों को गहराई से समझाने की कोशिश की है। सती प्रथा के नाम पर कैसे एक औरत को ढोल नगाड़े के साथ लोग चिता पर चढ़ा देते। शोर शराबे में ही इसे चिता समेत नदी में उछाल दिया जाता। इस तरह की विसंगतियां व रजवाड़ों की संघर्ष की कहानी इस किताब के अंदर समाई हुई है। इसके अलावा इस किताब में कई और कहानियों को भी सामाजिक परिदृश्य में समेटा है। कैसे यमुना पार रत्नों की खोज में लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हैं, उपन्यास पढ़ने पर ये कहानी रोचक लगेगी। किताब सेतु प्रकाशन ने प्रकाशित की है।

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