फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वाजे ने ईडी से कहा: तबादले के आदेश रुकवाने के लिए 10 डीसीपी ने देशमुख और परब को दिए 40 करोड़ रुपये

Fri, 17 Sep 2021 03:31 PM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

वाजे को उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास के निकट विस्फोटक सामग्री वाली एसयूवी पाए जाने और ठाणे के कारोबारी मनसुख हिरन की हत्या के मामले में इस साल मार्च में गिरफ्तार किया गया था।
 
विज्ञापन
सीएसटी स्टेशन पर सचिन वाजे (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिव वाजे ने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री अनिल परब पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दिए अपने बयान में वाजे ने कहा है कि परब और अनिल देखमुख ने परमबीर सिंह द्वारा जारी तबादला आदेशों को रोकने के एवज में 10 पुलिस उपायुक्तों (डीसीपी) से 40 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी।

विज्ञापन


यह बयान ईडी द्वारा देशमुख के पूर्व निजी सचिव संजीव पलांडे और निजी सहायक कुंदन शिंदे के खिलाफ मनी लांड्रिंग के मामले में हाल में दायर आरोप पत्र का हिस्सा है। परमबीर सिंह ने जुलाई, 2020 में मुंबई में 10 डीसीपी के स्थानांतरण के आदेश जारी किए थे।

वाजे ने अपने बयान में दावा किया कि सिंह द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश को लेकर तत्कालीन गृह मंत्री देशमुख और परब खुश नहीं थे। वाजे ने कहा, ‘बाद में मुझे पता चला कि स्थानांतरण आदेश में सूचीबद्ध पुलिस अधिकारियों से 40 करोड़ रुपये की राशि एकत्र की गई थी, जिनमें से अनिल देशमुख और अनिल परब और 20-20 करोड़ रुपये दिए गए थे।’
विज्ञापन


गिरफ्तार किए गए पलांडे और शिंदे के अलावा मनी लॉंड्रिंग मामले में दायर आरोप पत्र में वाजे का नाम भी आरोपी के रूप में दर्ज है। आरोप पत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता देशमुख या उनके परिवार के किसी सदस्य का नाम आरोपी के रूप में शामिल नहीं किया गया है। पलांडे और शिंदे इस मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।

आरोप पत्र में कहा गया है कि पलांडे और शिंदे ने धनशोधन मामले में अहम भूमिका निभाई थी। केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि उसकी जांच में खुलासा हुआ है कि देशमुख बार और रेस्तरां से एकत्र धन को सौंपने को लेकर वाजे से संपर्क करते थे। 

परम बीर सिंह द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने के बाद सीबीआई ने एनसीपी नेता के खिलाफ 21 अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने देशमुख और उनके सहयोगियों के खिलाफ जांच आरंभ की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें