इसरो वर्ष 2040 तक भारतीय यात्री को चांद पर भेजने की योजना बना रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अध्यक्ष एस सोमनाथ ने बताया कि इस मिशन के लिए भारतीय वायुसेना से चार नामित-अंतरिक्ष यात्री चुने गए हैं। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद पहली बार भारतीयों को चंद्रमा पर पहुंचाने की योजना बनाने पर पूरे जोश से काम हो रहा है।
सोमनाथ ने यह भी कहा कि वर्ष 2025 में प्रस्तावित गगनयान कार्यक्रम के जरिये अंतरिक्ष में अगला कदम बढ़ाया जा रहा है। इसमें दो से तीन भारतीयों को पृथ्वी के निचले परिक्रमा पथ (लियो) पर तीन दिन के लिए भेज कर उनकी सुरक्षित वापस करवाई जाएगी। इस समय इन अंतरिक्ष यात्रियों को बंगलूरू स्थित अंतरिक्ष-यात्री प्रशिक्षण केंद्र (एटीएफ) में मिशन के अनुसार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मिशन से पहले दो मानव रहित मिशन जी1 और जी2 भेजे जाएंगे, एयर ड्रॉप टेस्ट, पैड अबॉर्ट टेस्ट, परीक्षण उड़ान भी होंगे। मिशन के लिए पहली परीक्षण रॉकेट की विकास-उड़ान (टीवी-डी1) इसी वर्ष 21 अक्तूबर को हुई थी, जो सफल रही। मिशन में कोई गड़बड़ी होने पर अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बचाने की क्रू-एस्केप प्रणाली को परखा गया। एजेंसी
एल1 बिंदु पर जनवरी में पहुंचेगा आदित्य
एस सोमनाथ ने बताया कि भारत का पहला सूर्य मिशन आदित्य एल1 जनवरी 2024 में ही लग्रांजियन बिंदु 1 पर अपनी कक्षा में स्थापित होगा। इसके जरिये 5 साल तक सूर्य का अध्ययन होगा। यह भारत के चंद्रमा के साथ सूर्य मिशन भेजने की भी कुव्वत साबित करेगा।
एसएसएलवी...ऑन-डिमांड प्रक्षेपण की ताकत देगा
स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएसएलवी) के बारे में इसरो प्रमुख ने कहा कि यह तीन स्टेज का रॉकेट 500 किलो वजनी उपग्रह 500 किमी ऊंचाई तक परिक्रमा पथ पर पहुंचा सकता है। इसके जरिये एक साथ कई उपग्रह प्रक्षेपित हो सकते हैं। यह कम से कम जरूरतों में ऑन-डिमांड प्रक्षेपण कर सकता है।
अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयाें को हासिल करेगा भारत
सोमनाथ ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष केंद्र स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य दिया है। शुक्र ग्रह के लिए परिक्रमा मिशन व मंगल ग्रह के लिए लैंडर मिशन के जरिये भी भारत की अंतरिक्ष में मौजूदगी और मजबूत की जाएगी। आने वाले वर्षों में भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम नई ऊंचाइयां हासिल करेगा।