वैश्विक दक्षिण के एजेंडे को बढ़ाने के लिए ब्रिक्स-प्लस को मजबूत करना रूस का लक्ष्य है। यह बात भारत में रूसी उप-मिशन प्रमुख रोमन बाबुश्किन ने शुक्रवार को कही। समूह की अध्यक्षता अभी रूस के पास ह ै।
बाबुश्किन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का विषय 'ब्रिक्स-प्लस का उद्भव और उसका प्रक्षेपवक्र' (इमरजेंस ऑफ ब्रिक्स-प्लस एंड इट्स ट्रेजेक्टरी) रखा गया था। इस दौरान उन्होंने कहा, ब्रिक्स विविधता, सम्मान और उचित व समान वैश्विक वित्तीय और व्यापारिक मॉडल को बढ़ावा देता है।
अमेरिका और पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, रूस नियम-आधारित आदेश (रूल बेस्ड ऑर्डर) को नहीं मानता है। क्योंकि इसे उन लोगों ने कभी नहीं समझा है, जिन्होंने इस विचार को पेश किया था। इसे विभिन्न देशों के द्वारा पेश किया था। वे इस नियम-आधारित आदेश के झंडे तले प्रतिबंध लगा रहे हैं। उन्होंने नियम आधारित आदेश के तहत बहुपक्षीय संस्थानों का राजनीतिकरण किया है।
रूसी राजनयिक ने आगे कहा, बढ़ती भूराजनीतिक उथल-पुथल के बीच ब्रिक्स का लगातार विस्तार हो रहा है। अब इसमें मिस्र, इथियोपिया और सऊदी अरब सहित दस देश शामिल होने वाले हैं। कई और देश भी इस समूह में शामिल होना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, ब्रिक्स आम सहमति पर आधारित, समान रूप से लाभकारी और गैर-राजनीतिक सहयोग प्रदान करता है। ब्रिक्स में दबदबे के लिए कोई जगह नहीं है। कोई टकराव नहीं है। कोई दोहरा मापदंड, प्रतिबंध, अर्थव्यवस्था और मुद्राओं का शस्त्रीकरण नहीं है।
बाबुश्किन ने कहा, समूह के अध्यक्ष के रूप में रूस का लक्ष्य वैश्विक दक्षिण के एजेंडे को बढ़ावा देना है और उसके लिए समूह को और मजबूत करना है। उन्होंने कहा, ब्रिक्स समूह के सदस्य देश अपनी मुद्राओं में व्यापार और एक स्वतंत्र भुगतान तंत्र तैयार करने के लिए लगातार कदम उठा रहे हैं।