आचार संहिता चुनावों की घोषणा होते ही लागू कर दी जाती है। आचार संहिता चुनाव की तारीख की घोषणा होने के साथ लागू हो जाती है और नतीजे आने तक जारी रहती है। शनिवार को चुनाव आयोग ने पांच राज्यों (मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना) में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया है। इसी के साथ इन राज्यों में भी आचार संहिता लागू हो चुकी है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आचार संहिता का पुलिस अधिकारी और शासकीय कर्मचारियों पर क्या असर पड़ता है और इस दौरान इन्हें किन नियमों का पालन करना पड़ता है-
पुलिस अधिकारी एवं शासकीय कर्मचारियों के लिए-
- आचार संहिता के दौरान कोई भी पुलिस अधिकारी और शासकीय कर्मचारी किसी भी आधिकारिक चर्चा के लिए संघ या राज्य के किसी भी मंत्री, निर्वाचन क्षेत्र या राज्य के किसी भी संबंधित अधिकारी को नहीं बुलाएंगे।
- कोई भी मंत्री संबंधित विभाग के प्रभारी के रूप में या फिर कोई मुख्यमंत्री तभी एक निर्वाचन क्षेत्र की आधिकारिक यात्रा कर सकता है, जब कोई आपात स्थिति आ जाए। उदाहरण के लिए कहीं पर प्राकृतिक आपदा आ जाना।
- इस तरह की स्थिति में मंत्रियों के साथ साथ पुलिस अधिकारी संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में जा सकते हैं।
- अगर उस स्थान पर कानून और व्यवस्था में विफलता आ जाए तो भी मंत्री और अधिकारी वहां जा सकते हैं। वह लोगों को समझाने के अलावा स्थिति को नियंत्रण में लाने का काम करेंगे।
ये दिशानिर्देश यानि आचार संहिता देश की सभी राजनीतिक पार्टियों पर लागू किया जाता है। जिसका उद्देश्य पार्टियों के बीच मतभेद टालने, शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव कराना होता है। आचार संहिता द्वारा ये सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी, केंद्रीय या राज्य की अपने आधिकारिक पदों का चुनावों में लाभ हेतु गलत इस्तेमाल न करें।