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Lokpal Act : बाबुओं की संपत्ति का लेखा-जोखा देना अनिवार्य नहीं, छह साल बाद भी नए नियम नहीं बने

Fri, 16 Sep 2022 01:19 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लोकपाल कानून के तहत कर्मचारियों के विभिन्न सेवा नियमों के अतिरिक्त उनकी संपत्तियों व देनदारियों का भी हर साल खुलासा करना अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक लोक सेवक को धारा 44 के तहत हर साल 31 मार्च को या 31 जुलाई को या उससे पहले संपत्ति का विवरण दाखिल करना आवश्यक था।

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lokpal, लोकपाल - फोटो : twitter
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विस्तार
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लोकपाल व लोकायुक्त कानून 2013 में भले ही केंद्र सरकार के बाबुओं के लिए हर साल उनकी संपत्तियों व कर्ज का लेखा-जोखा देना जरूरी हो, लेकिन इसके नियम छह साल बाद भी नहीं बनाए जा सके हैं। 

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केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय (DOPT) ने भ्रष्टाचार रोधी कार्यकर्ता अजय दुबे की एक आरटीआई अर्जी के जवाब में नए नियम अभी अधिसूचित नहीं किए जाने की जानकारी दी। लोकपाल कानून के तहत कर्मचारियों के विभिन्न सेवा नियमों के अतिरिक्त उनकी संपत्तियों व देनदारियों का भी हर साल खुलासा करना अनिवार्य किया गया है। लोकपाल कानून के अधिसूचित नियमों के अनुसार प्रत्येक लोक सेवक को धारा 44 के तहत हर साल 31 मार्च को या 31 जुलाई को या उससे पहले संपत्ति का विवरण दाखिल करना आवश्यक था।

इसके बाद 2014 मे बाबुओं के लिए संपत्ति का ब्योरा दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 सितंबर की गई थी। इसके बाद भी कई बार अंतिम तिथि बढ़ाई गई और अंततः कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने एक दिसंबर 2016 को यह मियाद अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दी। तब यह कहा गया था कि संबंधित नियमों के नए प्रारूप को अंतिम रूप दिया जा रहा है, लेकिन इसके लगभग छह साल बाद भी सरकार ने अभी तक नियमों को अधिसूचित नहीं किया है।
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डीओपीटी ने पीटीआई के एक पत्रकार द्वारा दायर आरटीआई अर्जी के जवाब में कहा कि लोकपाल अधिनियम की धारा 44 के संशोधित प्रावधानों के अनुसार घोषणा पत्र दाखिल करने के लिए फॉर्म और तरीके को निर्धारित करने के लिए नए नियमों को अधिसूचित किया जाना बाकी है। 

डीओपीटी के 2016 के आदेश में कहा गया था कि लोक सेवकों के लिए संपत्ति और देनदारियों का ब्योरा अभी दाखिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकार नए नियमों सेट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। लोकपाल कानून के संशोधित प्रावधान के तहत लोक सेवकों द्वारा संपत्ति और देनदारियों की घोषणा दाखिल करने के लिए प्रपत्र, तरीके और समय सीमा सरकार तय करेगी।

चार माह से लोकपाल नहीं
अजय दुबे ने कहा है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लोकपाल अधिनियम के सभी प्रावधान जल्द से जल्द लागू हों। लोकपाल कानून 2013 में पारित होने के छह साल बाद मार्च 2019 में जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को देश का पहला लोकपाल बनाया गया था। जस्टिस घोष का कार्यकाल इस साल मई में पूरा हो गया। लोकपाल दफ्तर करीब चार महीने से मुखिया के बिना काम कर रहा है। अभी लोकपाल में आठ पद स्वीकृत हैं, जबकि छह सदस्य कार्यरत हैं। न्यायिक सदस्यों के दो पद दो साल से अधिक समय से खाली पड़े हैं।

झारखंड के दो पुलिस उप निरीक्षक निलंबित
उधर, झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में दो पुलिस उप निरीक्षकों को ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (पूर्वी सिंहभूम) प्रभात कुमार ने कोतवाली थाने के उप निरीक्षक अमित कुमार रविदास और सुरेंद्र कुमार शर्मा को कथित रूप से लापरवाही, असंवेदनशील और सनकी कार्यशैली तथा वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया। 

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