महाराष्ट्र के बुलढाणा में नागपुर-मुंबई 'समृद्धि एक्सप्रेसवे' पर हुए बस हादसे में आरटीओ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ड्राइवर का लाइसेंस और वाहन का पंजीकरण रद्द कर दिया है। इससे पहले हादसे की फॉरेंसिक जांच में पता चला था कि दुर्घटना के वक्त बस का चालक शराब के नशे में था। एक अधिकारी ने कहा कि यवतमाल में उप क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने पुलिस से प्राप्त दुर्घटना की फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर दोषी बस चालक का लाइसेंस रद्द कर दिया है।
गौरतलब है, शनिवार तड़के बुलढाणा के पिंपलखुटा गांव में नागपुर-मुंबई 'समृद्धि एक्सप्रेसवे' पर डिवाइडर से टकराने के बाद बस में आग लग गई थी। बस में करीबन 33 यात्री मौजूद थे, जिनमें से 25 की जलकर मौत हो गई थी। वहीं, भीषण दुर्घटना में ड्राइवर और 'क्लीनर' (ड्राइवर का सहायक) सहित आठ लोग बच गए थे। ड्राइवर की पहचान दानिश शेख के रूप में हुई, जिसे बाद में लापरवाही से गाड़ी चलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था।
अधिकारी ने कहा, आरटीओ ने स्लीपर कोच बस (जिसकी नंबर प्लेट MH29 BE1819 थी) का पंजीकरण भी रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा कि बस 1 जनवरी, 2020 को पंजीकृत हुई थी और उसके पास 10 मार्च, 2024 तक वैध फिटनेस प्रमाणपत्र था। अधिकारी ने कहा कि ड्राइवर ने बहुत अधिक मात्रा में शराब पी रखी होगी, तभी हादसे के कई घंटों बाद भी उसके खून में एल्कोहल पाया गया है। दरअसल, ड्राइवर का खून का नमूना दुर्घटना के 12 से 13 घंटे बाद लिया गया था।
जांच से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चला है कि ड्राइवर के खून के नमूने में 0.30 फीसदी अल्कोहल पाया गया। ड्राइवर ने बहुत अधिक मात्रा में शराब पी रखी होगी, तभी हादसे के कई घंटों बाद भी उसके खून में एल्कोहल पाया गया है। दरअसल, ड्राइवर का खून का नमूना दुर्घटना के 12 से 13 घंटे बाद लिया गया था।
इस बस के पहले भी कई बार चालान काटे गए थे, सवाल यही है इतने चालान के बाद भी यह बस सीज क्यों नहीं कई गई। 5 फरवरी, 2021 से 12 जून, 2023 तक, बस मुख्य रूप से नागपुर-पुणे मार्ग पर चलती थी। ऑनलाइन उपलब्ध ई-चालान के रिकॉर्ड के अनुसार आरटीओ कार्यालयों द्वारा विभिन्न उल्लंघनों के लिए लगभग सात चालान काटे गए। 12 जून, 2023 को यवतमाल आरटीओ ने बस की टूटी विंडस्क्रीन के लिए 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। वहीं चालानों का निपटारा त्रासदी के दिन, एक जुलाई को, टूटी हुई विंडस्क्रीन के 500 रुपये सहित कुल 11,200 रुपये का जुर्माना अदा करके किया गया। हालाँकि, यह पहली बार नहीं था कि क्षतिग्रस्त विंडस्क्रीन के लिए बस के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
चालान से पता चलता है कि बस मालिक और ड्राइवर पर समाप्त हो चुके फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए 24,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। गौरतलब है कि कुछ चालानों को पिछले साल 38,700 रुपये का जुर्माना 11 अक्तूबर की शाम को भरा गया था। दिलचस्प बात यह है कि यह दूसरा मौका था जब निजी बस पर एक्सपायर्ड फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए जुर्माना लगाया गया। ऑनलाइन डेटा के अनुसार, 24 अगस्त, 2022 को औरंगाबाद आरटीओ द्वारा इसी तरह के उल्लंघन के लिए 4,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।