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हर न्याय पंचायत तक पहुंचने का है आरएसएस का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी समेत कांग्रेस, बसपा और समाजवादी पार्टी जातिगत समीकरणों को साधकर सियासी मैदान में उतर रही हैं। इन चुनावों को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हर न्याय पंचायत तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हुए एक नई योजना बनाई है। संघ से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक यह वह इलाके होंगे, जहां पर अभी तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से लोगों को इतनी मजबूती से नहीं जोड़ा जा सका है। इसलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हर न्याय पंचायत तक पहुंचने का लक्ष्य तय कर चुका है। जानकारी के मुताबिक इन सभी न्याय पंचायतों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा लगाने की तैयारी चल रही है। कहा यह भी जा रहा है, जहां पर शाखा की संभावना न हो वहां पर विस्तारकों के माध्यम से उस समुदाय तक अपनी विचारधारा पहुंचाई जाए। दलित समुदाय पर फोकस करते हुए उनके इलाकों में संघ और स्वयंसेवक पहुंचने की पूरी रणनीति तैयार कर चुके हैं।
अगले एक सप्ताह में ढाई हजार विस्तारकों को मिलेगी नई जिम्मेदारी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक प्रमुख पदाधिकारी बताते हैं कि जो भी उनकी रणनीति बन रही है वह चुनाव के मद्देनजर बिल्कुल नहीं है। उनका मानना है कि उनकी विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने की यह दैनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने समरसता कार्यक्रम को और तेज करके दलित बस्ती और आदिवासियों के इलाकों में जाने की पूरी रणनीति तैयार कर चुका है। संघ से जुड़े लोगों का मानना है कि अगले एक सप्ताह के भीतर ढाई हजार से ज्यादा स्वयंसेवकों को विस्तारक बनाकर अलग-अलग क्षेत्रों में भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह विस्तारक सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी अभियान के तहत काम करते हुए लोगों तक पहुंचेंगे। संघ की योजना के मुताबिक राज्य के प्रत्येक न्याय पंचायत में जल्द से जल्द पहुंचने का लक्ष्य तय किया गया है। न्याय पंचायतों में संघ की शाखाओं को लगाने की तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि जिन जगहों पर शाखाएं नहीं लग सकेंगी वहां पर विस्तारक संघ की विचारधारा को आगे रखकर लोगों को जागरूक करेंगे।
जाटव के साथ बाल्मीकि, थारू, कोल, मुसहर पर है संघ का ध्यान
जानकारी के मुताबिक अवध, कानपुर, काशी और गोरख क्षेत्र में अगले एक सप्ताह के भीतर ढाई हजार विस्तारक संघ को मिल जाएंगे। ये सभी विस्तारक तराई क्षेत्रों के साथ-साथ प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में समरसता कार्यक्रम के माध्यम से लोगों से मुलाकात करके संघ की विचारधारा से अवगत कराएंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान उन इलाकों को भी चिन्हित किया जाएगा, जहां पर अभी तक शाखाएं नहीं लगती हैं। तैयारी यही है कि उन सभी जगहों पर शाखाएं लगाई जाएं, जहां पर शाखाएं नहीं लग रही हैं। हालांकि लोकसभा चुनावों से पहले की इस प्रक्रिया को संघ राजनीति से दूर रखने की बात कर रहा है लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी साल में इस तरीके की सक्रियता को राजनीति से दूर नहीं किया जा सकता है।
दलित वोटरों को साधने की रणनीति
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि संघ ने जो रणनीति बनाई है, उसके बहुजन समाज पार्टी के बड़े वोट बैंक में सेंधमारी की बड़ी तैयारी कही जा सकती है। राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि बीते कुछ चुनावों में जिस तरीके से बहुजन समाज पार्टी के दलित वोट बैंक में भारतीय जनता पार्टी ने सेंधमारी की, उससे बसपा को बड़ा नुकसान हुआ है। बीते कुछ चुनावों में गिरते हुए जनाधार और कम आ रही सीटों को देखते हुए बसपा ने भी अपनी रणनीति बदली है। जटाशंकर सिंह का कहना है कि मायावती के कोर वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा जाटव समुदाय से आता है। वह कहते हैं अगर भाजपा ने संघ के माध्यम से इस समुदाय में भी सेंधमारी की, तो बसपा के लिए चुनौतियां बड़ी हो सकती हैं। इस पूरे मामले पर बसपा का कहना है कि वह भाजपा की सियासी साजिश को भलीभांति समझ चुकी है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मनीष मिश्रा कहते हैं कि यही वजह है कि मायावती ने दलितों के साथ-साथ मुस्लिमों को भी अपने साथ जोड़ने के लिए सियासी दांव चलने शुरू किए हैं। मंगलवार को मायावती ने देश के कुछ हिस्सों में दरगाहों और मजारों पर चल रहे बुलडोजर पर सरकारों को आड़े हाथों लिया।