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खड़गे का निशाना: शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में संघ की घुसपैठ, इस लड़ाई में मैंने लोकसभा सीट भी गंवाई

Wed, 06 Oct 2021 06:19 PM IST
Amit Mandal पीटीआई, बंगलूरू

सार

खड़गे ने कहा कि मैं संघ से लड़ते-लड़ते अपना चुनाव भी हार गया था। यह गरीब समर्थक नहीं है, और सामाजिक न्याय के लिए भी नहीं है। संघ मनुस्मृति में विश्वास करता है।
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मल्लिकार्जुन खड़गे - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आरएसएस शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में घुसपैठ कर रहा है। खड़गे ने कहा कि संगठन के खिलाफ उनकी लंबी लड़ाई के चलते उन्हें 2019 के संसदीय चुनावों के दौरान अपनी लोकसभा सीट गंवानी पड़ी।

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खड़गे ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वे (आरएसएस) हर जगह घुसपैठ कर रहे हैं, यहां तक कि शिक्षा के क्षेत्र में भी वे आ रहे हैं। कई अधिकारियों को सीधे भर्ती कर रहे हैं, नियमों में संशोधन कर रहे हैं जबकि इतने लोग आरक्षण से वंचित हैं। 

बंगलूरू में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह 15-16 साल की उम्र से आरएसएस और उसकी विचारधारा से लड़ रहे हैं। यह लड़ाई गुलबर्गा सीट से 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी हार का एक कारण है। खड़गे ने कहा, हम आरएसएस के खिलाफ लड़ रहे हैं, हम इसे छिपाना नहीं चाहते। हम लड़ेंगे और इसलिए मैं अपना चुनाव भी हार गया। आरएसएस गरीब समर्थक नहीं है, यह सामाजिक न्याय के लिए नहीं है। वे मनुस्मृति में विश्वास करते हैं। आरएसएस के दूसरे सरसंघचालक गोलवलकर गुरुजी को पढ़ें। 
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खड़गे, जद (एस) नेता एच डी कुमारस्वामी के उस बयान पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने एक किताब का जिक्र किया था कि आरएसएस ने अपने छिपे हुए एजेंडे के तहत इस देश में नौकरशाहों की एक टीम बनाई है, जिन्हें अब विभिन्न संस्थानों में रखा गया है। पूर्व सीएम ने मंगलवार को दावा किया था कि इस पुस्तक में कहा गया है कि इस देश में लगभग 4,000 आईएएस, आईपीएस अधिकारी आरएसएस के कार्यकर्ता हैं। उन्हें परीक्षा लिखने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। एक वर्ष में, अकेले 2016 में उनके द्वारा प्रशिक्षित 676 लोगों का चयन किया गया। 

वहीं लखीमपुर खीरी कांड पर खड़गे ने तथ्यों को सामने लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश से जांच कराने और अवैध रूप से हिरासत में लिए गए विपक्षी नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग की।

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