देश में बढ़ रही जातिवाद की घटनाओं से संघ बेहद चिंतित है। उसे इस बात की आशंका है कि पटरी पर दौड़ रही उसकी राष्ट्रवादी सियासत के राह में जातिवाद की राजनीति रोड़ा अटका सकती है। इसलिए जातिवादी राजनीति को संघ अपने लिए बड़ा खतरा मान रहा है।
जातिवाद सियासत के ट्रेलर के रूप में बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों को भगवा परिवार पहले ही देख चुका है। अब यूपी विधानसभा चुनाव से पहले वह अपनी कमजोरी दूर करने के साथ-साथ सियासी मुद्दे को जातिवाद से हटाकर दोबारा से राष्ट्रवाद के मुद्दे पर लाने की जुगत में है।
यही वजह है कि राजस्थान के जाट बाहुल्य मारवाड़ में अपने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के जरिए संघ के पूरे शीर्ष नेतृत्व ने मैराथन बैठक में अधिकांश समय तक जातिवादी सियासत के असर और उससे उबरने के उपायों पर ही मंथन किया।
राष्ट्रवादी राजनीति के राह में रोड़ा बन रहे जातिवाद सियासत की काट के लिए संघ ने एकबार फिर से समरसता को अपना औजार बनाया है। आयोजन स्थल में चित्र लगाने से लेकर मुख्य द्वार बनाने तक में समरसता का भाव जताया गया।
संघ के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि सियासी दलों को उनके विरूद्ध कोई मुद्दा नहीं मिल पा रहा है। केंद्र की सरकार भी कमोबेश सही दिशा में कार्य कर रही है। इसलिए अपनी राजनीतिक पकड़ बनाने के लिए विपक्षी दल किसी न किसी बहाने जातिवाद के सियासत को हवा देंगे।
उससे सचेत रहने की जरूरत है। जातिवादी सियासत की काट के लिए ही समरसता पर प्रस्ताव पारित कर हमने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। संघ का जोर समरसता पर रहेगा। उक्त अधिकारी के अनुसार आयोजन स्थल पर भी इसका ख्याल रखा गया।
जातिवादी राजनीति की काट में निकाला समरसता का अस्त्र
संघ नागौर
- फोटो : Rashtriya Swayamsevak Sangh FB Page
संघ बैठक स्थल का नाम बाबा साहब अंबेडकर के नाम पर रखा गया। तो स्वयं सेवकों में समरसता का भाव पैदा करने के लिए प्रत्येक दिन आदर्श चित्र लगाए गए। तो मुख्य द्वारा स्थानीय लोक देवता तेजाजी के नाम पर रखा गया। जोकि जाट बिरादरी से थे। सांप काटने पर मेवाड़ के लोग आज भी दवा लेने के बजाय तेजाजी को याद करते हैं।
पहले दिन बाबा अंबेडकर की चित्र के साथ बाला साहब देवरस का चित्र लगाया गया। बाबा साहब संविधान निर्माता के साथ-साथ दलित उत्थान के प्रणेता हैं। तो संघ तृतीय सरसंघ चालक बाला साहब देवरस को भी समाज में समरसता का हितैषी माना जाता है।
दूसरे दिन स्थानीय लोक देवता के रूप में पहचान रखने वाले बाबा रामदेव का चित्र लगाया गया। बाबा रामदेव के राजपूत बिरादरी से होने के बावजूद भी निचले तबके के लोग उन्हें अपना मसीहा मानते हैं। तो आयोजन के तीसरे दिन मीरा बाई और अमृता देवी की तस्वीरें लगाईं गईं थी।
नारी शक्ति के प्रदर्शन के साथ-साथ समरसता का संदेश भी रहा। अमृता देवी निचले तबके के बिश्नोई समाज से आती हैं। लेकिन समी के पेड़ों की रक्षा के लिए उन्होंने अपनी जान के साथ-साथ अपने तीन बेटियों की जान गंवाई है।
संघ को नहीं लग रहा सरकार में बदलाव का माहौल
संघ नागौर
- फोटो : Rashtriya Swayamsevak Sangh FB Page
संघ के सरकार्यवाह भैय्या जी जोशी सरकार के कामकाज पर मुहर लगा चुके हैं। लेकिन संघ ये भी मानता है कि सरकार ने जिस तरीके के उम्मीदें दिखाकर आम आदमी में उम्मीदों की भूख जगाई थी।
उसपर वह खरी नहीं उतरी है। बावजूद उसके संघ मोदी सरकार के कामकाज से संतुष्ट है। एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार सरकार बेशक सतरंगी सपने पूरा नहीं कर सकी है। लेकिन सामान्य रूप से कामकाज ठीक दिशा में चल रहा है।
सरकार के खिलाफ कहीं से भी कोई बड़ा असंतोष नहीं दिखाई पड़ रहा है। इसलिए सरकार में बेवजह की बदलाव या छेड़छाड़ उचित नहीं है।