केरल में हो रही अपने कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले को लेकर संघ किसी समझौते के मूड में नहीं है। संघ ने केंद्र सरकार पर इस बात का दबाव बनाया है कि केरल में वाम शासन में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हो रही हत्या के मामलों की वह न्यायिक जांच कराए।
संघ ने सरकार से कहा है कि जरूरत पडने पर उसे केरल में राष्ट्रपति शासन सरीखे कदम पर भी विचार करना चाहिए। वामपंथ को तालिबान का रूप करार देते हुए संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि केरल में संघ कार्यकर्ताओं की हो रही लगातार हत्या देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है।
केरल में कानून व्यवस्था की स्थिति को बेहद दयनिय करार देते हुए संघ ने कहा है कि यहां वहां सरकारी मशीनरी के प्रश्य में उनके कार्यकर्ताओं की आए दिन हत्याएं हो रही है। केरल में संघ कार्यकर्ताओं के जरिए कुछ घटनाओं को अंजाम दिए जाने के सवाल पर होसबोले ने कहा कि उनके कार्यकर्ता वैसे तो मामले में शामिल नहीं होते, मगर कुछ जगह बदले की भावना में वे भी आ जाते हैं। जिसकी संख्या बेहद कम है।
उन्होंने कहा कि संघ कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए अधिकांश आरोप बेबुनियाद हैं। होसबोले ने कहा कि संघ कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को भी नहीं देता है। यदि उसके लोग कहीं कुछ गलत करते हैं तो कानून को उनपर कार्य करना चाहिए।
स्वयंसेवक पीएम और गृहमंत्री से संघ मांगे मोर
दरअसल स्वयंसेवक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वयंसेवक गृहमंत्री राजनाथ सिंह से संघ को केरल मामले में ढेरों अपेक्षाएं हैंं मगर सियासी मजबूरियों के चलते केंद्र सरकार भी आगे खुद से बढकर केरल मामले में कुछ ज्यादा नहीं कर सकती है।
यही वजह है कि राज्य में सीधे राष्ट्रपति शासन की मांग के बजाय संघ केरल में दबाव की राजनीति कर रहा है। होसबोले ने कहा कि जनता और सामज के प्रबुद्ध वर्ग के बीच से जब मांग उठ रही है तो सरकार को राज्यपाल से रिपोर्ट मंगाकर केरल में राष्ट्रपति शासन लगाने की बात पर विचार करना चाहिए। यह संघ की भी मांग है। उन्होंने कहा कि हमारे जरिए मामला उठाने के बाद संसद से लेकर सडक तक केरल में जारी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के मामले की चर्चा हो रही है।
उन्होंने कहा कि देश के वित्त मंत्री 6 अगस्त को केरल जाकर मृतक कार्यकर्ता कमे परिवार से मुलाकात करेंगे। उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जोकि देश में असहिष्णुता की बात करते हैं। होसबोले ने कहा कि लोगों को केरल की हत्याओं की भी चर्चा करनी चाहिए। यहां दलित और पिछडों की हत्याएं की जा रही हैं। उन्होंने सरकार से केरल मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की।