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केरल मामले को लेकर संघ ने बनाया केंद्र सरकार पर दबाव, की न्यायिक जांच या राष्ट्रपति शासन की मांग

Fri, 04 Aug 2017 09:36 PM IST
संजय मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मोहन भागवत - फोटो : SELF
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केरल में हो रही अपने कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले को लेकर संघ किसी समझौते के मूड में नहीं है। संघ ने केंद्र सरकार पर इस बात का दबाव बनाया है कि केरल में वाम शासन में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हो रही हत्या के मामलों की वह न्यायिक जांच कराए।
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संघ ने सरकार से कहा है कि जरूरत पडने पर उसे केरल में राष्ट्रपति शासन सरीखे कदम पर भी विचार करना चाहिए। वामपंथ को तालिबान का रूप करार देते हुए संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि केरल में संघ कार्यकर्ताओं की हो रही लगातार हत्या देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है।

केरल में कानून व्यवस्था की स्थिति को बेहद दयनिय करार देते हुए संघ ने कहा है कि यहां वहां सरकारी मशीनरी के प्रश्य में उनके कार्यकर्ताओं की आए दिन हत्याएं हो रही है। केरल में संघ कार्यकर्ताओं के जरिए कुछ घटनाओं को अंजाम दिए जाने के सवाल पर होसबोले ने कहा कि उनके कार्यकर्ता वैसे तो मामले में शामिल नहीं होते, मगर कुछ जगह बदले की भावना में वे भी आ जाते हैं। जिसकी संख्या बेहद कम है।
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उन्होंने कहा कि संघ कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए अधिकांश आरोप बेबुनियाद हैं। होसबोले ने कहा कि संघ कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को भी नहीं देता है। यदि उसके लोग कहीं कुछ गलत करते हैं तो कानून को उनपर कार्य करना चाहिए। 

स्वयंसेवक पीएम और गृहमंत्री से संघ मांगे मोर 
दरअसल स्वयंसेवक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वयंसेवक गृहमंत्री राजनाथ सिंह से संघ को केरल मामले में ढेरों अपेक्षाएं हैंं मगर सियासी मजबूरियों के चलते केंद्र सरकार भी आगे खुद से बढकर केरल मामले में कुछ ज्यादा नहीं कर सकती है।

यही वजह है कि राज्य में सीधे राष्ट्रपति शासन की मांग के बजाय संघ केरल में दबाव की राजनीति कर रहा है। होसबोले ने कहा कि जनता और सामज के प्रबुद्ध वर्ग के बीच से जब मांग उठ रही है तो सरकार को राज्यपाल से रिपोर्ट मंगाकर केरल में राष्ट्रपति शासन लगाने की बात पर विचार करना चाहिए। यह संघ की भी मांग है। उन्होंने कहा कि हमारे जरिए मामला उठाने के बाद संसद से लेकर सडक तक केरल में जारी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के मामले की चर्चा हो रही है।

उन्होंने कहा कि देश के वित्त मंत्री 6 अगस्त को केरल जाकर मृतक कार्यकर्ता कमे परिवार से मुलाकात करेंगे। उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जोकि देश में असहिष्णुता की बात करते हैं। होसबोले ने कहा कि लोगों को केरल की हत्याओं की भी चर्चा करनी चाहिए। यहां दलित और पिछडों की हत्याएं की जा रही हैं। उन्होंने सरकार से केरल मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की। 

देशवासियों से आवाज उठाने का किया आह्वान

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केरल में चल रही राजनीतिक हत्याओं के खिलाफ आवाज उठाने के लिए संघ ने देशवा​सियों से आ​ह्वान किया है कि वे इन घटनाओं के खिलाफ आवाज बुलंद करें। होसबोले ने कहा कि देश में असहिष्णुता की बात तो उठती है मगर केरल की घटनाओं के खिलाफ भी आवज उठनी चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं को मौत के घट उतार देना लोकतंत्र के खिलाफ है। संघ ने कहा है कि केरल में उसके ऐसे स्वयंसेवकों पर हमला किया जा रहा है जो अत्यंत सामान्य परिवारों या पिछड़ी जातियों से हैं। यह केवल संघ पर ही हमला नहीं है बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन और देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है। इस मामले को उसने सभी संबद्ध पक्षों से गंभीरता से लेने का आग्रह किया है। संघ का कहना है कि संविधान के दायरे में उचित कार्रवाई करके इश्वर के अपने इस स्थान को असहिष्णु कम्युनिस्ट व इस्लामिक विचारधाराओं से बचाना चाहिए।

दलित एवं महिलाओं को भी निशाना बना रहे हैं वामपंथी
संघ का कहना है कि यह लडाई वैचारिक या संघ बनाम वामपंथ की नहीं है। बल्कि राजनीतिक कार्यकर्ता बनाम वामचरमपंथ के बीच की है। संघ के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि दलितों और महिलाओं तक को निशाना बनाया जा रहा है। इसमें कार्यकर्ताओं के बीच भी भेद नहीं है। कांग्रेस और मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं को भी वाम आतंकवाद ने समय—समय पर निशाना बनाया है। सत्ता में आने के बाद उसके निशाने पर अभी संघ के कार्यकर्ता सबसे ज्यादा हैं।

उन्होंने कहा कि संघ के बस्ती कार्यवाह एसएल राजेश की निर्मम हत्या ने एक बार पुन: माकपा द्वारा की जा रही हत्याओं की राजनीति की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया है। पिछले 12 महीनों में यह संघ के 13वें कार्यकर्ता की हत्या है, इसके अलावा भाजपा की एक महिला कार्यकर्ता को जिंदा जलाया गया।

संघ का कहना है कि केरल में माकपा की हत्या की राजनीति का लंबा इतिहास है। वर्ष 1969 में पहली बार केरल में संघ के कार्यकर्ता की हत्या की गई थी जब मार्क्सवादी नेताओं को लगा कि राष्ट्रीयता से परिपूर्ण इस संगठन का प्रभाव क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। तब से अब तक लगभग 300 स्वयंसेवकों की माकपा कार्यकर्ताओं द्वारा हत्या की जा चुकी है। कम्युनिस्टों के बीच इसे 'कन्नूर मॉडल' का नाम दिया गया है। 
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हिंसा और हत्याओं का दौर संघ बनाम माकपा नहीं 

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वामपंथ के खिलाफ अपने सबसे बडी लडाई को व्यापक रूप देने की कवायद में संघ इसे वाम बनाम संघ के रूप में पेश करने के मूड में नहीं है। संघ का कहना है कि आपातकाल के बाद जब बड़ी संख्या में कम्युनिस्ट कार्यकर्ता संघ की ओर आ रहे थे, उस समय इन हत्याओं में  कई गुना वृद्धि हुई।

होसबोले ने कहा कि हिंसा और हत्याओं का यह दौर केवल संघ बनाम माकपा नहीं है, जैसा कि कई बुद्धिजीवियों ने प्रदर्शित करने का प्रयास किया है। बल्कि  यह संघर्ष माकपा बनाम सभी अन्य है। जो कोई भी माकपा के अत्याचार और अन्याय के खिलाफ खड़ा होने का प्रयास करता है, फिर भले ही वह माकपा का कार्यकर्ता, क्यों न हो, उसे हिंसा का शिकार होना पड़ता है।

रूख में नरमी लाने के मूड में नहीं है संघ 
केरल के मामलों को लेकर आक्रामक रूख अख्त्यिार कर चूका संघ अब इस मामले में नरमी लाने के मूड में नहीं है। केरल सरकार के जरिए नरमी बरतने के संकेतों और चर्चा के लिए सर्वदलिय बैठक बुलाए जाने के प्रस्ताव पर संघ ने कहा है कि इतनी हिंसा होने के बाद भी हमने हमेशा बातचीत से मामला सुलझाने का प्रयास किया, अब तक तीन बार हम ऐसा प्रयास कर चुके हैं। हर बार इसकी प्रतिक्रिया में यां तो किसी स्वयसंवेक की निर्मम हत्या कर दी जाती है यां हमारा  उपहास किया जाता है।

​मुख्यमंत्री पिणराई विजयन स्वयं कन्नूर से हैं तथा उन पर राजनीतिक हत्याओं का आरोप है। जब से उन्होंने राज्य में कमान संभाली है तब से यह हिंसक राजनीतिक चरमोत्कर्ष पर पहुंच गई है। ऐसे में प्रदेश सरकार पर विश्वास करने लायक माहौल बचा नहीं है। होसबोले ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्रालय और राज्यपाल के निर्देश पर राज्य सरकार ने बातचीत की पहल की है। मगर वह भी दिखावटी है।
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